डियर मोदी हमारा भविष्य बचाएं

आमतौर पर 7 वर्ष की उम्र के बच्चे बस खेल कूद कर अपना जिस समय काटते हैं लेकिन भारत के मणिपुर की लिस प्रिया कुछ अलग है यह बच्ची अब तक कई बड़े देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर जलवायु परिवर्तन के खतरों पर अपने व्याख्यान दे चुकी हैं उल्लेखनीय है कि यह बच्ची में 7 साल की है परंतु इसकी व्याख्या नो कि समूचे विश्व में अच्छी खासी मांग है आज लिस प्रिया पुनः सुर्खियों में है क्योंकि जिस प्रिया ने संसद के सामने खड़ी होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग कर रही है कि डियर मोदी जलवायु परिवर्तन पर कानून बनाकर हमारा भविष्य बचाएं हाथ की में लिखी उसकी है तख्ती आते जाते लोगों के आकर्षण का केंद्र भी बनी हुई है और साथ ही संसद भवन के बाहर 7 वर्ष की लिस प्रिया के खड़े होने से समूचे विश्व की पर्यावरण पर जनता की सार्थकता पर सवालिया निशान लग जाता है दूसरी क्लास में पढ़ने वाली लिसी प्रिया मणिपुर की रहने वाली हैं उसे संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक मंच के छठवें सत्र में संबोधन के लिए बुलाया था आपदा प्रबंधन से बातचीत के दौरान लिसी प्रिया सभी को बताती हैं कि जब वह टेलीविजन पर देखती है कि भूकंप बाढ़ और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदा के चलते बहुत से छोटे छोटे बच्चों के मां-बाप दुनिया छोड़ देते हैं और बच्चे बेघर हो जाते हैं तो वह बात डर जाती हैं और रोने लगती हैं आगे लिसी प्रिया आग्रह करती है कि सभी लोग जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक आपदा पर्यावरण क्षति जैसे मुद्दों पर अपना दिमाग और जुनून लगाएं ताकि हम सभी एक बेहतर दुनिया का निर्माण कर सकें वह संयुक्त राष्ट्र ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन और स्विट्जरलैंड सरकार की ओर से आमंत्रण प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की पहली प्रतिभागी हैं वह अब तक 8 देशों में जलवायु परिवर्तन को लेकर भाषण दे चुकी हैं अब देखना यह है कि देश के संवेदनशील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मासूम बच्ची के संदेश पर कितनी गंभीरता का परिचय देते हैं

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