दिख रहा है सब कुछ फिर भी आंखें बंद किए जा रहा हूं

मजबूरियां

दिख रहा सब कुछ है फिर भी आंखें बंद किए जा रहा हूं

दर्द का सफर है फिर भी मंजिल का रास्ता तय किए जा रहा हूं…..

दिख रहा है दर्द मजदूरों का

दिख रहा है फर्ज बेबस डॉक्टरों का

दिख रहा है हौसला पुलिस के जवानों का

फिर भी आंखें बंद किए बैठा हूं,

दर्द का सफर है
फिर भी मंजिल का रास्ता तय किए जा रहा हूं…..

मैं वक्त हूं वक्त के साथ चला जा रहा हूं ,
रुक नहीं सकता बस हौसले दिए जा रहा हूं ….

शासन की मजबूरियां

सरकार की खामोशियां

कुछ मानवतावादी अपना प्यार दिए जा रहे हैं ,

सब कुछ दिख रहा है फिर भी आंखें बंद किए जा रहा हूं ,

दर्द का सफर है फिर भी मंजिल का रास्ता तय किए जा रहा हूं…

आदि से मानव ने जीती है अपनी हर जंग ,

ना जाने क्यों इस बार हो चुका है वह इतना तंग ,

हौसले को उसके बढ़ाया जा रहा हूं ,
मैं वक्त हूं वक्त के साथ चला जा रहा हूं …

रुक नहीं सकता इसलिए बस हौसले दिए जा रहा हूं…………

बस हौसले दिए जा रहा हूं

 

सारिका श्रीवास्तव

संवादाता दूरदर्शन

एडिटर news4indiatv

संपादक

इनसाइड भारत

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