दो और तीन जुलाई के मध्य पड़ने वाले सूर्य ग्रहण का क्या रहेगा प्रभाव जाने

साल 2019 का दूसरा सूर्य ग्रहण आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि को यानी 2 और 3 जुलाई की मध्यरात्रि में लगने जा रहा है। भारतीय समय के अनुसार यह खग्रास सूर्यग्रहण आधी रात में होने की वजह से भारत में दृश्य नहीं होगा। 2 जुलाई को न्यूजीलैंड तट से ग्रहण का आरंभ होगा। इस ग्रहण को ब्राजील, अर्जेंटीना, चिली, कोलम्बिया, पेरू के अलावा प्रशान्त महासागर के क्षेत्र में भी देखा जा सकेगा। पारग्वे, उरुग्वे, इक्वाडोर में भी इस सूर्य ग्रहण को आंशिक रूप से लोग देख सकेंगे।

सूर्य ग्रहण का समयः
भारतीय समय के अनुसार ग्रहण का आरंभ रात 10 बजकर 25 मिनट पर हो सकता है। खग्रास आरंभ रात 11 बजकर 32 मिनट पर, ग्रहण का मध्य जिसे परमग्रास कहते हैं वह रात 12 बजकर 53 मिनट पर होगा। ग्रहण समाप्त यानी ग्रहण का मोक्ष 3 जुलाई को सुबह 3 बजकर 21 मिनट पर होगा। यानी यह ग्रहण करीब 4 घंटे का होगा।

देश दुनिया पर प्रभाव
12 घंटे पहले लगेगा सूतक
इस सूर्यग्रहण का सूतक दिन में 10 बजकर 25 मिनट पर आरंभ हो जाएगा। लेकिन भारत में ग्रहण दृश्य नहीं होने की वजह से ग्रहण के सूतक का विचार यहां नहीं होगा। शास्त्रों में नियम है कि ग्रहण के सूतक का विचार उन्हीं स्थानों पर होता है जहां वह दृश्य होता है और जहां ग्रहण के दौरान सूर्य या चंद्रमा की रोशनी पड़ती है।

सूर्यग्रहण को लेकर क्या कहते हैं धर्म और विज्ञान
सूर्यग्रहण और प्रभाव
इससे पहले साल की शुरुआत में 5 जनवरी को सूर्यग्रहण लगा था। साल का अंतिम सूर्यग्रहण 26 दिसंबर को लगेगा। यह सूर्यग्रहण भारत में भी दिखेगा। इस ग्रहण का प्रभाव भारत पर भी होगा और इसका सूतक भारत में रहने वालों को लगेगा। ज्योतिषशास्त्री बताते हैं कि ग्रहण चाहें जहां भी लगे लेकिन राशियों पर इसका असर जरूर होता है। अपनी राशि पर ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम करने के लिए आप अपनी इच्छानुसार अनाज, धन, वस्त्र का दान कर सकते हैं। 3 जुलाई को सूर्योदय से पूर्व स्नान करके उगते सूर्य को जल दें और अपने कुल देवी-देवता की पूजा करें।

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