प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के लापता होने की, लगे पोस्टर 21000 इनाम की ,की गई है घोषणा भी

छिंदवाड़ा/ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे सांसद नकुल नाथ के लापता होने का पोस्टर आज शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है पोस्टर में पिता एवं पुत्र को लापता बताया गया है साथ ही पोस्टर में ₹21000 इनाम की घोषणा भी की गई है.

जाहिर सी बात है कि पोस्टर दिन के समय तो नहीं लगाए गए हैं रातों-रात यह पोस्टर आखिर लगाएं किसने बहरहाल कांग्रेस के नेताओं द्वारा इस बात की घोर निंदा करते हुए कार्यवाही करने की मांग की है वहीं कांग्रेस के विधायकों एवं पदाधिकारियों ने कलेक्टर को इस संबंध में ज्ञापन सौंपकर कार्यवाही की मांग भी की है।


आश्चर्य की बात तो यह है कि लॉक डाउन की स्थिति में रातों-रात आखिर यह पोस्टर लगे कैसे और वह भी ऐसी जगहों पर जैसे कलेक्ट्रेट ऑफिस की दीवार पर हमेशा भीड़ भाड़ रहने वाले एकता पार्क की दीवारों पर साथ ही साथ ऐसे अन्य जगहों पर जो मुख्य रोड के आसपास हैं जाहिर सी बात है अज्ञात तत्वों की जानकारी अब शहर में लगे सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से ही पता किया जा सकता है।इस विषय पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री गंगाप्रसाद तिवारी ने बताया कि दिनांक 18 एवं 19 मई 2020 की मध्य रात्रि मे शहर के विभिन्न वार्डो की सडको एवं मुख्य सडको पर मान. श्री कमलनाथजी एवं मान. श्री नकुलनाथजी के विरूद्ध फोटोयुक्त पोस्टर लगाये गये है जिसमे नेताद्वय के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। इस प्रकार के पोस्टर लगाये जाने से कांग्रेस कार्यकर्ता आंदोलित एवं आहत महसूस कर रहा है।

श्री तिवारी ने आगे बताया कि यह कार्य दिनांक 18 एवं 19 मई 2020 की मध्य रात्रि मे किया गया प्रतीत होता है। चूंकि शहर मे शाम 7 बजे से प्रातः 7 बजे तक लाकडाउन लगाया गया है और लोगो को सडको पर निकलना प्रतिबंधित है ऐसी स्थिति मे असामाजिक तत्वो द्वारा पोस्टर लगाकर लाकडाउन के नियमो का उल्लंघन किया गया है। जिलाप्रशासन एवं पुलिस प्रशासन शहर मे सडको पर सी सी टी वी कैमरे लगे है जिनके माध्यम से ऐसे असामाजिक तत्वो के खिलाफ प्रमाण जुटाये जा सकते है।

श्री तिवारी ने यह भी कहा कि आज पूरा देश कोरोना महामारी से लड रहा है उस समय ऐसे असामाजिक तत्वो द्वारा ध्यान हटाकर दूसरी ओर लगाने का प्रयास किया जा रहा है जो अवांछनीय है।
चाहे बात जो भी हो परंतु मामला विभिन्न रंग ले रहा है जहां एक ओर कमलनाथ समर्थक इसकी घोर निंदा कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर विरोधी गण इसे जनता के दिल की आवाज बताते हुए राइट ऑफ एक्सप्रेशन नाम का कानूनी अधिकार बता रहे हैं जोकि भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों में शामिल है और आईपीसी में भी ऐसे किसी पोस्टर के लिए कोई दंड का प्रावधान नहीं है क्योंकि यहां विचारों की सहज अभिव्यक्ति के अंतर्गत हैं ऐसा विरोधियों का मानना है अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले की जांच कर किस निर्णय पर पहुंचता है वहीं दूसरी ओर पिता पुत्र इस मामले की गंभीरता में किसी दस्तक की अनुभूति करते हैं या फिर इसे अपने अधीनस्थों को डिस्पोज आफ करने छोड़ देते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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