भाजपा नेत्री ने दिलाई सर की कसम और कहा…..

अमेठी।  हत्या की वारदात ने समूचे क्षेत्र में सनसनी पैदा कर दी माहौल गमगीन हो चला पर हर किसी के मन में यह सवाल है की कातिल ने इस हत्या को आखिर क्यों अंजाम दिया प्रशासन और पुलिस भी खौफ में हैं कि इस हाई प्रोफाइल हत्या में अब कोई नया अपराध ना घटित हो जाए ऐसे में अमेठी से नवनिर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी ने जो कदम उठाया वह निश्चित ही प्रशंसा और जनप्रतिनिधित्व के विश्वास की पराकाष्ठा में खडा उतरने वाला था हम आपको बता दें की दिवंगत भाजपा नेता और स्मृति ईरानी के बेहद करीबी कहलाने वाले गांव की प्रतिष्ठित पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह का 21 वर्षीय बेटा अभय नवनिर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी को देख रो पड़ा तो स्मृति ने उन्हें गले लगा लिया। उसके बाद स्मृति ने कुछ ऐसा किया जिसे देखकर सभी भावुक हो गए स्मृति ईरानी ने अपने पिता की हत्या से आहत युवा कोई गलत कदम न उठा ले उसकी आशंका के निवारण के लिए उस युवा पुत्र का हाथ अपने सिर पर रखकर कहा, बेटा तुम्हें मेरी कसम है कुछ गलत नहीं करना और उन्होंने उस बच्चे का हाथ अपने सिर पर रख दिया और कुछ इस तरह की प्रतिज्ञा उससे लेने को कहा‘कसम खाओ मेरी कि तुम कुछ गलत नहीं करोगे’। बोलीं, तुमने अपने पिता को और मैंने अपना एक विश्वसनीय भाई खोया है। इसे सुनकर वहां खड़े हर व्यक्ति की आंखों से आंसू बहने लगे। क्योंकि यह अवसर अमेठी के दिवंगत नेता की शव यात्रा का था स्मृति ने मृतक नेता के पुत्र अभय का हाथ पकड़ा और उसे बाहर लेकर आ गई और कहां स्मृति आओ अब हम हमारे बड़े भाई और तुम्हारे पापा को श्रद्धा और प्रेम से विदा करते हैं और उन्हें कांधा देते हैं। इतना ही नहीं मसला और गम लीन हो गया जब नवनियुक्त अमेठी सांसद स्मृति ईरानी ने एक एक और भाजपा नेता को कंधा दिया तो दूसरी और उनकी 21 वर्षीय पुत्र ने अर्थी को कंधा दिया बताया जा रहा है कि पिता की इस आकस्मिक निधन और हत्या से बेटा बहुत विचलित हो गया है और अपनी सुध बुध खो बैठा है दिवंगत पिता सुरेंद्र के गम में अत्यंत विचलित हो चुके पुत्र कुछ ही दूर चलकर गम में अत्यंत असहज हो गए और उनकी कदम भी लड़खड़ाने लगे तो मृतक सुरेंद्र की परिवार से जुड़े अन्य परिवारजनों मित्रों और भाजपा के दूसरे बड़े नेताओं ने अर्थी थाम ली।
नवनियुक्त सांसद स्मृति ईरानी ने समूची शव यात्रा के दौरान मृतक के घर से शमशान घाट तक के सफर में एक पल भी अपने कंधों को विश्राम नहीं दिया और अपने भाई सुरेंद्र केशव को कंधों में सम्मान पूर्वक अंतिम विदाई हेतु बिना थके रखें हुए नजर आए। एक स्त्री की गरिमा साहस और क्षमताओं को ध्यान में रखकर स्मृति ईरानी की इस व्यवहार से सभी बहुत आश्चर्यचकित हुए और लंबी दूरी की शव यात्रा और हजारों की संख्या में परिवार जन और कार्यकर्ताओं की भीड़ के बीच जब भाजपा के आला नेताओं को यह स्मरण आया कि कहीं दीदी स्मृति ईरानी थकना गई हो तो उन्होंने उन्हें कहा कि अब कुछ दूर हमें आपके कंधे से यह जवाबदारी हमें उठा लेने दीजिए और स्मृति जी आप हट जाइए तो वह कुछ नहीं बोली अपने भाई को कंधा देते हुए आगे बढ़ते चली गई और श्मशान तक कंधे से मृतक भाई सुरेंद्र को ना हटने दिया हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते हुए शव को 5 बार धरती मां में रखा जाता है और उसे उठाकर पुनः नियमानुसार इष्ट मित्र रिश्तेदार और परिवार जन कंधा देते हैं और श्मशान घाट तक की यात्रा तय करते हैं परंतु इन सारे रीति-रिवाजों को निभाते हुए हर बार स्मृति ईरानी ने उन्हें कंधा दिया और श्मशान घाट तक इस क्रम का निर्वहन करती चली गई।

आज से मैं ही आपका बेटा हूं मां
अपने सबसे प्यारे कार्यकर्ता से अंतिम बार मिलने के बाद जब स्मृति घर के अंदर पहुंचीं तो सुरेंद्र की मां की गोद में अपना सिर रख दिया और कहा आज से मैं ही आपका बेटा हूं मां। बड़े भाई नरेंद्र के चरणों में शीश झुकाकर बहन होने का अहसास कराया तो दिवंगत कार्यकर्ता की पत्नी को बाहों में भर अपनत्व का मरहम लगाने की कोशिश की। शादीशुदा बेटी पूजा व प्रतिमा के सिर पर अपना हाथ फेरा और कहा हर पल साथ रहेगी तेरे पापा की दीदी।
बहन ने उठाई भाई की अर्थी तो रो पड़ी हर आंख
स्मृति ईरानी ने दिवंगत भाई सुरेंद्र सिंह की अर्थी उठाई तो पूरा का पूरा बरौलिया व अमरबोझा गांव जब तक सूरज- चांद रहेगा सुरेंद्र तेरा नाम रहेगा के नारे से गूंज उठा। इससे पहले दिल्ली से सीधे पूर्व प्रधान के घर जब स्मृति ईरानी पहुंची तो संवेदनाएं उफान पर थी। लोग गुस्से से भरे बैठे थे। शव को देखते ही स्मृति की आंखें नम हो गईं और वह निशब्द सीजन पढ़ रही थी। उन्होंने अपने जुझारू कार्यकर्ता अमेठी की राजनीति में उनके सहयोगी और मार्गदर्शक को मन भर के दुख भरी नजर से देखा और उसके चरणों में अपने सिर रख दिया। मृत शैया पर कार्यकर्ता और उनका विश्वसनीय भाई सुरेंद्र का शव और मृतक के चरणों पर स्मृति ईरानी का झुका शीश था। जो इस बात की तस्दीक कर रहा था कि अमेठी से जो रिश्ता उन्होंने जोड़ा है वह अटूट है। इस तरह स्मृति ईरानी ने जिस तरह भावात्मक रिश्ता अपने नव निर्वाचित संसदीय क्षेत्र अमेठी से जोड़ा है वह ना सिर्फ अमेठी में अपितु सारे देश की राजनीति में एक उदाहरण बन कर सामने आया है अपने कार्यकर्ताओं के प्रति ऐसी निष्ठा और समर्पण का भाव यदि जनप्रतिनिधि रखते हैं तो निश्चित ही भारतीय प्रजातंत्र की सफलता और जवाबदारी की भावना एक साफ-सुथरी छवि के रूप में विश्व पटल पर अंकित की जा सकेगी

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