माँ

कोई न होगा जग में ऐसा जैसी मां होती है ….
हर ग़म को हर लेती है
खुशियां सारी देती है
हमारी एक मुस्कान पर ,

जग की सारी खुशियाँ पाती है ,

होगा ऐसा कोई ,जैसी मां होती है

कोई न होगा जग में ऐसा जैसी मां होती है …

नौ रूप समाए मां में है  …

कभी दुर्गा बन दुख हरती मां,
अन्नपूर्णा बन देती भोजन,

प्रथम गुरु भी तो मां ही होती

बन सरस्वती देती ज्ञान,

कालरात्रि बन , हर बिगड़े काम बनाती मां,
होगा कोई ऐसा जग में जैसी मां होती है
कोई न होगा जग में ऐसा जैसी मां होती है ….
हममें देखे खुशियां अपनी ,
जैसे जग समाया हो
मां यशोदा ने  भी अपने कान्हा के मुख में ब्रम्हांड देखा था …..

कोई न होगा जग  में ऐसा जैसी मां होती है ….

कोई न होगा जग में  ऐसा जैसी मां होती है ….

ले रूप धरती पर , स्वमेव
ईश्वर आते है …
अपने हर रूप से खुशियां दे ,

ग़म हरते है ..
ईश्वर को न देखा हमने ..
मां में ईश्वर देखा है

कोई न होगा जग में ऐसा जैसी मां होती है ….

कोई न होगा जग में  ऐसा जैसी मां होती है ….

हमारी एक मुस्कान पर ,

जग की सारी खुशियाँ पाती है ….

 

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