मेरे पापा

दिन भी थक कर सांझ हो गई,
सुबह दोपहर फिर रात हो गई,
चिड़िया का कलरव शांत हो गया,
सूरज छुपकर चांद हो गया

मेरे पापा अब भी जागे ,
मेरे सपनों में रंग भरने

जली रोटियां मेरे हाथों की खाते
जब मैं पढ़ती …..
दिन भर से थके ,आंखों में नींद लिए, फिर भी बैठे रहते पास मेरे….
मेरे पापा अब भी जागे
मेरे सपनों में रंग भरने

जो मैं मांगू वो ला देते,
कभी नहीं वह आंख दिखाते,
हल्की सी सर्दी में भी,
सिरहाने सारी रात बिताते

मेरे पापा अब भी जागे
मेरे सपनों में रंग भरने

मेरी सौ गलतियों पर भी ,
बनते थे अनजान ,
मेरी एक हंसी पर ,
होते हैं कुर्बान

अपने दुख -तकलीफ छुपाते,
कभी ना अपनी थकन बताते,
मेरे पापा अब भी जागे
मेरे सपनों में रंग भरने

आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया,
अनुशासन जीवन का सिखलाया ,
आत्मसम्मान में कभी ना झुकना ,
बेटी होकर भी बेटों सा जीना सिखलाया,

मेरे पापा अब भी मेरी हिम्मत बनते हैं
मेरे सपनों में रंग भरते हैं……

 

🖋️सारिका

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