हनी ट्रैप मामला समाज में बढ़ती संवेदनहीनता का सूचक

हनी ट्रैप मामला, समाज में बढ़ती संवेदनहीनता का सूचक
सारिका श्रीवास्तव
एक स्वच्छ और विकसित समाज राष्ट्रीय विकास का सूचक है। स्वच्छ एवं श्रेष्ठ मानसिकता जिसमें उत्तम चरित्र समाहित हो ,भारतीय दर्शन का प्रतीक है ।परंतु, आज भारतीय अध्यात्म, दर्शन और चिंतन के लुप्त होने के स्पष्ट संकेत दिख रहे हैं। मैं बात कर रही हूं ,हनी ट्रैप मामले की। समाज की तमाम बड़ी शख्सियत इन मामले में ऐसे संलग्न है। जैसे कोई गलत काम है ही नहीं। यह एक आश्चर्य की विषय बिंदु है। विज्ञान और समाज आज इतनी आगे बढ़ चुका है। मंच पर बड़े-बड़े आदर्शों और भारतीय दर्शनों के व्याख्यान देने वाले महान नेता और अधिकारी जन इन मामलों में इस तरह की संदेहास्पद भूमिका रखते हुए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुर्खियों में है ,जो कि ना सिर्फ उनके लिए अपितु समूचे राष्ट्र के लिए अत्यंत चिंताजनक है। प्रश्न यह उठता है, यह तमाम बड़े अधिकारी प्रसिद्ध नेता और समाज में महान कहलाई जाने वाली शख्सियत इन तुच्छ से मामलों में क्यों संलग्न है। दुनिया को कानून सुरक्षा और उस से बढ़कर भारतीय संस्कृति विशेषता का पाठ पढ़ाने वाले स्वयं इतने चरित्रहीन क्यों है ?यह शर्म और चिंतन दोनों का विषय है ।आज हमारे संस्कार दूषित हो चले हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेता बार-बार इस बात पर जोर दे रहे हैं, कि हनी ट्रैप मामले को किसी पार्टी से ना जोड़ें ।बात सही भी जान पड़ती है, किसी पार्टी से जोड़ना उचित नहीं है। क्योंकि ,अब यह एक ऐसा मसला हो गया है, अमूमन जिसमें सभी वर्ग के लोगों का संलग्न होना सामने आया है। जो अभी पुलिस जांच में है और चिंताजनक भी है। वैसे तो नेताओं को समाज पहले से ही सर्वगुण संपन्न मानता है ।उनकी इस चिंताजनक गतिविधियों को कहीं ना कहीं स्वीकार भी करता है। शायद ,यही कारण है ,कि अपराधियों का राजनीति में प्रवेश रोका नहीं जा सका है ।अपराधियों का राजनीति में प्रवेश निश्चित ही हमारे मतदान व्यवहार की विसंगतियों को प्रदर्शित करता है ।परंतु ,उच्च प्रशासनिक सेवाओं में पदस्थ अधिकारियों का यौन अपराधों में लिप्त होना ,आज हमारी प्रशासनिक सेवाओं की चयन प्रक्रिया को भी कहीं ना कहीं दूषित इंगित कर रहा है। परंतु, गंभीरता से विश्लेषण और मंथन किया जाए ,तो जो तथ्य हमारे सामने आएंगे वह निश्चित ही चौका देने वाले होंगे। ऐसा व्यक्ति जो यौन अपराधों में लिप्त हैं ,वह नेता हो या अधिकारी उसकी इस मानसिकता के लिए समाज ही उत्तरदाई है। क्योंकि, समाज में हम हमेशा ऐसे अपराधियों को छोड़ने और माफ करने पर जोर देते रहे हैं और आज भी हनीट्रैप मामले में बहुत से शीर्षस्थ अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपने किसी खास को इस मामले से निकालने और बचाने में लीपापोती में लगे प्रतीत होते हैं। फिर भी, मंत्री मध्यप्रदेश सरकार बाला बच्चन का यह बयान की कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल का हो या कितना भी बड़ा अधिकारी हो, यदि हनीट्रैप मामले में दोषी पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी ,हमें आंशिक सहानुभूति प्रदान करता है ।मामला एक यौन अपराध का नहीं है ।मामला राष्ट्रीय विकास की गिरते हुई ग्राफ का है ।
जो कि कहीं ना कहीं यह इंगित करता है, कि वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि भोग विलास के पीछे अपना सर्वत्र त्यागने में लगे हुए हैं और अपनी मान प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगा दिए हैं ।ऐसे में राष्ट्रीय विकास और जनहित पर वह कितना बल देते होंगे, यह अंदाजा लगा पाना बहुत आसान है ।ऐसे अधिकारी और नेता निश्चित ही अपने मतलब के लिए राष्ट्रीय हित और विकास को दाव में लगा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे ।ऐसे लोगों पर कार्यवाही किया जाना अति आवश्यक है। ताकि ऐसे प्रसंग समाज के लिए संदर्भ बने और जब भी कोई अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस प्रकार के कृत्य करने का चिंतन और मनन करें ,तो उसे भान हो , की ऐसे प्रकरणों में भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत तत्काल एवं प्रतिष्ठा भंग करने वाली कार्यवाही होती है। मुझे चिंता है, की कहीं हमारा राष्ट्र ऐसे ही संवेदनहीन, चिंतन विमुख और अपराधियों के हाथ में तो नहीं चला गया है ,जो बहरूपिया की तरह कभी नेता बनकर तो कभी अधिकारी बनकर भारतीय संस्कृति का अपमान करते चले आ रहे हैं और देश को फिर पीछे धकेलने में लगे हुए हैं।इन दोषियो पर कड़ी कार्यवाही ही ऐसे हाई प्रोफाइल सेक्स एब्यूज की रोकथाम के त्वरित उपाय जान पड़ता है।फिर ,उनको क्या समझाइश या काउंसिलिंग दे,जो खुद उसके लिए अधिकृत और जवाबदार माननीय कहलाते है।

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