मेरे पापा

दिन भी थक कर सांझ हो गई, सुबह दोपहर फिर रात हो गई, चिड़िया का कलरव शांत हो गया, सूरज छुपकर चांद हो गया मेरे पापा अब भी जागे , मेरे सपनों में रंग भरने जली रोटियां मेरे हाथों की खाते जब मैं पढ़ती ….. दिन भर से थके ,आंखों में नींद लिए, फिर भी बैठे रहते पास मेरे…. मेरे पापा अब भी जागे मेरे सपनों में रंग भरने जो मैं मांगू वो ला देते, कभी नहीं वह आंख दिखाते, हल्की सी सर्दी में भी, सिरहाने सारी रात बिताते मेरे…

Read More