मनुष्य की निर्मात्री नारी ही है, नारी को अपनी शक्ति का महत्व समझना चाहिए

*नारी से ही मनुष्य उत्पन्न होता है। बालक की आदि गुरु उसकी माता ही होती है। पिता के वीर्य की एक बूँद ही निमित्त मात्र होती है, बाकी बालक के समस्त अंग-प्रत्यंग माता के रक्त से बनते हैं। उस रक्त में जैसी स्वस्थता, प्रतिभा, विचार-धारा, अनुभूति होगी उसी के अनुसार बालक का शरीर, मस्तिष्क और स्वभाव बनेगा। नारियाँ यदि अस्वस्थ, अशिक्षित, अविकसित, पराधीन, कूपमण्डूक और दीन-हीन रहेंगी तो उनके द्वारा उत्पन्न बालक भी इन्हीं दोषों से युक्त होंगे। ऊसर खेत में अच्छी फसल उत्पन्न नहीं हो सकती।* *यदि मनुष्य जाति…

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मन का भार हल्का रखिये

कल न जाने क्या होगा? नौकरी मिलेगी या नहीं, कक्षा में उत्तीर्ण होंगे या अनुत्तीर्ण, लड़की के लिये योग्य वर कहाँ मिलेगा, मकान कब तक बन कर पूरा होगा, कहीं वर्षा न हो जाय, जो पकी फसल खराब हो जाय आदि बातों की निराशाजनक कल्पना द्वारा आप मन में घबराहट न पैदा किया करें। जो होना है, वह एक निश्चित क्रम से ही होगा, तो फिर घबराने, व्यर्थ विलाप करने अथवा भविष्य की चिन्ता में पड़े रहने से क्या लाभ? अवाँछित कल्पनाएं करेंगे तो आपका जीवन अस्त-व्यस्त होगा और व्यर्थ…

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सकारात्मकता का दीपक

एक जगह चार दीपक जल रहे थे। वे आपस में बातें करने लगे। पहला दीपक बोला… ‘‘हे ईश्वर! इस दुनिया में कितनी मार-काट मची हुई है। लोग स्वार्थ से अंधे हो गए हैं। ऐसे लोगों के लिए मेरी रोशनी किस काम की। और वह बुझ गया।’’ उसकी बात सुन रहा दूसरा दीपक भी कहने लगा… ‘‘लोगों के लिए पैसा ही सब कुछ हो गया है। जीवन से ज्ञान और संस्कार का प्रकाश खत्म हो चुका है, फिर मैं ही जल कर क्या कर लूंगा?’’ और वह भी बुझ गया। तीसरा…

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दुनिया का प्रथम धर्मग्रंथ क्या है

वेद दुनिया के प्रथम धर्मग्रंथ है। इसी के आधार पर दुनिया के अन्य मजहबों की उत्पत्ति हुई जिन्होंने वेदों के ज्ञान को अपने अपने तरीके से भिन्न भिन्न भाषा में प्रचारित किया। वेद ईश्वर द्वारा ऋषियों को सुनाए गए ज्ञान पर आधारित है इसीलिए इसे श्रुति कहा गया है। सामान्य भाषा में वेद का अर्थ होता है ज्ञान। वेद पुरातन ज्ञान विज्ञान का अथाह भंडार है। इसमें मानव की हर समस्या का समाधान है। वेदों में ब्रह्म (ईश्वर), देवता, ब्रह्मांड, ज्योतिष, गणित, रसायन, औषधि, प्रकृति, खगोल, भूगोल, धार्मिक नियम, इतिहास,…

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जानिए पितृ पक्ष में कौवे का क्यों है महत्व

धर्म ग्रंथों के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक का समय श्राद्ध या महालय पक्ष कहलाता है। 24 सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू हो चुके हैं। इस दौरान पितर यम लोक से 16 दिनों के लिए धरती पर आते हैं। साल में ये विशेष दिन होते हैं, जब आप अपने पितरों को सम्मान देकर उनका ऋण उतारने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आपको इस जीवन में लाकर जो उपकार किया है, उसके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का यह त्योहार है। श्राद्ध को तीन पीढ़ियों तक करने…

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