[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: साहित्य – News 4 India

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*नि:शब्द मेरी कलम* – सारिका श्रीवास्‍तव

*नि:शब्द मेरी कलम* – सारिका श्रीवास्‍तव

साहित्य
नि:शब्द हूं मैं ,नि:शब्द है मेरी आत्मा , *भारत मां हूँ मैं ,* असहाय और लाचार हूं , शर्मिंदा हूं , माफ करना मेरी प्यारी बेटियों नहीं कर पा रही हूं तुम्हारी रक्षा, लूट रही है तेरी इज्जत लूट रहा तेरा सम्मान है , शर्मिंदा हूं ,लाचार हैं ,असहाय हूं, *कैसे कहूं मैं तुम्हारी भारत मां हूं,*   कौन सी लक्ष्मण रेखा खींचूं , हर चौखट पर रावण जिंदा है , ना बची निर्भया ,आशिफ़ा, न गीता को छोड़ा है, रक्त रंजित तेरी चुनरी, संवेदना आज मोहताज है, शर्मिंदा हूं ,लाचार हूं, असहाय हूं, *कैसे कहूं ,मैं तुम्हारी भारत मां हूं,* अब मुझे किसी की हुकूमत नहीं भाती, कफन में लिपटी मेरी शहजादी  मुझे है रुलाती, गुड़िया से खेलने की उम्र में , बूत बनी मेरी लडलियाँ मुझे नहीं भाती , माफ करना मेरी लाड़लियों, मैं शर्मिंदा हूं , *मैं तुम्हारी भारत मां हूं* दो पल
A life of melody -Sumitra Nandan Pant , A great nature poet

A life of melody -Sumitra Nandan Pant , A great nature poet

साहित्य
Published on 10 February 2016 Hridesh shrivastava Guide Dr. Mrs. Kranti Vats Associate professor Govt. M. V. M. Bhopal   Sumitra Nandan Pant Pant,a great nature Hindi poet was born On May 20, 1900 He was Born In: Kumaon, Uttrakhand,surrounded by the beauty of nature. He Died On: December 28, 1977 At the age of seven, when majority of children learn how to read and write; a little child from the hills wrote poetries, and grew up to become one of India's finest and renowned poet cum writer. This boy was Sumitranandan Pant, also known as Gosain Dutt. Born in the hills of Kumaon, Pant was raised by his old grandmother, for his mother had passed away shortly after conceiving him. He had developed an early knack for writing poetry. But he didn't restrict himse
Life of Wordsworth -a nature poet of English

Life of Wordsworth -a nature poet of English

साहित्य
HRIDESH SHRIVSTAVA Published on 20 March 2015 GUIDE Dr Mrs kranti Vats Associate professor Govt. M.V.M Bhopal     Wordsworth's deep love for the “beauteous forms” of the natural world was established early. The Wordsworth children seem to have lived in a sort of rural paradise along the Derwent River, which ran past the terraced garden below the ample house whose tenancy John Wordsworth had obtained from his employer before his marriage to Ann Cookson. William attended the grammar school near Cockermouth Church and Ann Birkett's school at Penrith, the home of his maternal grandparents. The intense lifelong friendship between Dorothy and William Wordsworth probably began when they, along with Mary Hutchinson, attended school at Penrith. Wordsworth's early c
प्राकृतिक को सुंदरता प्रदान करने वाले

प्राकृतिक को सुंदरता प्रदान करने वाले

साहित्य
न्‍यूज 4 इंडिया।  सुमित्रानंदन पंत जी का जन्म अल्मोड़ा ज़िले के कौसानी नामक ग्राम में 20 मई 1900 ई. को हुआ। जन्म के छह घंटे बाद ही उनकी माँ का निधन हो गया। उनका लालन-पालन उनकी दादी ने किया। उनका प्रारंभिक नाम गुसाई दत्त रखा गया। वे सात भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा में हुई। 1918में वे अपने मँझले भाई के साथ काशी आ गए और क्वींस कॉलेज में पढ़ने लगे। वहाँ से माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण कर वे इलाहाबाद चले गए। उन्हें अपना नाम पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने अपना नया नाम सुमित्रानंदन पंत रख लिया। यहाँ म्योर कॉलेज में उन्होंने बारवीं में प्रवेश लिया। 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के भारतीयों से अंग्रेजी विद्यालयों, महाविद्यालयों, न्यायालयों एवं अन्य सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करने के आह्वान पर उन्होंने महाविद्यालय छोड़ दिया और घर पर ही हिन्दी, संस्
विश्‍वभारती सम्‍मान

विश्‍वभारती सम्‍मान

मध्य प्रदेश, साहित्य
उज्‍जैन न्‍यूज 4 इंडिया। संस्‍कृत के विद्वान डॉ. केशवराव सदाशिवशास्‍त्री मुसलगांवकर को 2017 का विश्‍वभारती राष्‍ट्रीय सम्‍मान प्रदान किया जाएगा। उत्‍तरप्रदेश सरकार द्वारा उन्‍हें 5 लाख 1 हजार रूपए सम्‍मान निधि भेंट की जाएगी।

मिलेगा डेमहुड सम्‍मान

दुनियामे हलचल, साहित्य
  लंदन न्‍यूज 4 इंडिया। भारतवंशी वैज्ञानिक प्रतिभा लक्ष्‍मण को इस बार डेमहुड सम्‍मान के लिए चुना है। 2018 में इंग्‍लैंड की महारानी द्वारा दिए जाने वाले इस सम्‍मान की रेस में कई भारतवंशी थे, लेकिन उनमें से प्रतिभा ने बाजी मार ली। यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क की प्रोफेसर प्रतिभा इलेक्‍ट्रान माइक्रोस्‍कोपी की एक्‍सपर्ट हैं। इस सम्‍मान के लिए चुनी गई वे चौथी भारतवंशी हैं। इससे पहले महारानी लक्ष्‍मी दवी(1931), आशा खेमका(2014) और प्रवीण कुमार (2017) शामिल हैं।
भगवान है ……एक जवान की जबानी…. सच्ची कहानी

भगवान है ……एक जवान की जबानी…. सच्ची कहानी

साहित्य
एक मेजर के नेतृत्व में 15 जवानों की एक टुकड़ी हिमालय के अपने रास्ते पर थी उन्हें ऊपर कहीं अगले तीन महीने के लिए दूसरी टुकड़ी की जगह तैनात होना था दुर्गम स्थान, ठण्ड और बर्फ़बारी ने चढ़ाई की कठिनाई और बढ़ा दी थी बेतहाशा ठण्ड में मेजर ने सोचा कि अगर उन्हें यहाँ एक कप चाय मिल जाती तो आगे बढ़ने की ताकत आ जाती लेकिन रात का समय था आस पास कोई बस्ती भी नहीं थी लगभग एक घंटे की चढ़ाई के पश्चात् उन्हें एक जर्जर चाय की दुकान दिखाई दी  लेकिन अफ़सोस उस पर ताला लगा था. भूख और थकान की तीव्रता के चलते जवानों के आग्रह पर मेजर साहब दुकान का ताला तुड़वाने को राज़ी हो गया खैर ताला तोडा गया तो अंदर उन्हें चाय बनाने का सभी सामान मिल गया जवानों ने चाय बनाई साथ वहां रखे बिस्किट आदि खाकर खुद को राहत दी  थकान से उबरने के पश्चात् सभी आगे बढ़ने की तैयारी करने लगे लेकिन मेजर साहब को यूँ चोरों की तरह दुकान का ताला तोड़ने के कार
सड़क के गढ्ढे में जलपरी कुछ समय पहले सड़क के गढ्ढे में मगरमच्छ नजर आया था

सड़क के गढ्ढे में जलपरी कुछ समय पहले सड़क के गढ्ढे में मगरमच्छ नजर आया था

राष्ट्रीय खबर, शिक्षा रोजगार, सामान्य ज्ञान, साहित्य
बेंगलुरु। बेंगलुरु में कुछ समय पहले सड़क के गढ्ढे में मगरमच्छ नजर आया था और अब इस बार ऐसे की एक गढ्ढे में जलपरी नजर आई जिसे लोग देखते ही रह गए। दरअसल यह असली जलपरी नहीं थी बल्कि एक मॉडल थी जिसे एक आर्टिस्ट ने वहां बैठाया था। इस आर्टिस्ट ने शहर की सड़कों पर ढेर सारे गढ्ढों के खिलाफ यह अलग तरह का प्रदर्शन किया है। जानकारी के अनुसार आईटी शहर बेंगलुरु में 16000 के लगभग गढ्ढे हैं और इन पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए आर्ट डायरेक्टर बादल नंजुदास्वामी ने शुक्रवार को कुबोन पार्क जंक्शन इलाके में सड़क पर गंदे पानी से भरे गढ्ढे पर अपनी कला का प्रदर्शन किया।
प्रेमचंद की कहानियां को आज भी भूले नहीं हैं लोग

प्रेमचंद की कहानियां को आज भी भूले नहीं हैं लोग

साहित्य
न्‍यूज 4 इंडिया। क्षेत्रीय साहित्य को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए अभियान शुरू करने वाले ‘कथा कथन’ के संस्थापक जमील गुलरेस ने कहा, ‘‘जब तक मानवीय संवेदना रहेंगी तब तक प्रेमचंद प्रासंगिक रहेंगे.’   साहित्य जगत में मुंशी प्रेमचंद का स्थान उस ऊंचाई पर हैं जहां बिरले पहुंच पाये हैं. उनकी कहानियों में ग्रामीण भारत खासतौर पर किसानों की स्थिति का जो वर्णन है वह किसानों की आज की हालत से कोई खास भिन्न नहीं है. प्रेमचंद ने करीब 300 लघु कहानियां, 14 उपन्यास अनेक नाटक , पत्र और निबंध लिखे हैं. प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८० – ८ अक्टूबर १९३६) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं मूल नाम धनपत राय वाले प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्य
ज्ञानबर्धक पुस्तकों की प्रदर्शनी

ज्ञानबर्धक पुस्तकों की प्रदर्शनी

छिंदवाड़ा अप्डेट्स, साहित्य
छिंदवाड़ा  राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा शासकीय लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छिन्दवाड़ा में आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी में उपस्थित जन-प्रतिनिधियों व शहर के नगर वासियों से अच्छा प्रोत्साहन मिलने के कारण उक्त पुस्तक प्रदर्षनी दिनांक 27 अगस्त 2017 दिन रविवार को भी खुली रहेगी। समस्त नगरवासियों, जन-प्रतिनिधियों, शासकीय या अषासकीय षिक्षण संस्थाओं को अवगत कराया जाता है कि शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छिन्दवाड़ा में आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी प्रातः 09.00 बजे से रात्रि 09.00 बजे तक खुली रहेगी। जिसमें आप एवं आपकी संस्थाओं में अध्ययनरत बच्चों को उक्त प्रदर्शनी में सामाजिक, पारिवारिक, संस्कृतिक, ऐतिहासिक, ज्ञानवर्धक, वैज्ञानिक, क्रीड़ा, स्वास्थ्य, सामान्य ज्ञान, महापुरूषों की जीवनी एवं अन्य रूचिकर विषयों से संबंधित पुस्तकें क्रय किये जाने