साहित्य

प्रेमचंद की कहानियां को आज भी भूले नहीं हैं लोग

प्रेमचंद की कहानियां को आज भी भूले नहीं हैं लोग

साहित्य
न्‍यूज 4 इंडिया। क्षेत्रीय साहित्य को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए अभियान शुरू करने वाले ‘कथा कथन’ के संस्थापक जमील गुलरेस ने कहा, ‘‘जब तक मानवीय संवेदना रहेंगी तब तक प्रेमचंद प्रासंगिक रहेंगे.’   साहित्य जगत में मुंशी प्रेमचंद का स्थान उस ऊंचाई पर हैं जहां बिरले पहुंच पाये हैं. उनकी कहानियों में ग्रामीण भारत खासतौर पर किसानों की स्थिति का जो वर्णन है वह किसानों की आज की हालत से कोई खास भिन्न नहीं है. प्रेमचंद ने करीब 300 लघु कहानियां, 14 उपन्यास अनेक नाटक , पत्र और निबंध लिखे हैं. प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८० – ८ अक्टूबर १९३६) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं मूल नाम धनपत राय वाले प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्य
ज्ञानबर्धक पुस्तकों की प्रदर्शनी

ज्ञानबर्धक पुस्तकों की प्रदर्शनी

छिंदवाड़ा अप्डेट्स, साहित्य
छिंदवाड़ा  राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा शासकीय लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छिन्दवाड़ा में आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी में उपस्थित जन-प्रतिनिधियों व शहर के नगर वासियों से अच्छा प्रोत्साहन मिलने के कारण उक्त पुस्तक प्रदर्षनी दिनांक 27 अगस्त 2017 दिन रविवार को भी खुली रहेगी। समस्त नगरवासियों, जन-प्रतिनिधियों, शासकीय या अषासकीय षिक्षण संस्थाओं को अवगत कराया जाता है कि शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छिन्दवाड़ा में आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी प्रातः 09.00 बजे से रात्रि 09.00 बजे तक खुली रहेगी। जिसमें आप एवं आपकी संस्थाओं में अध्ययनरत बच्चों को उक्त प्रदर्शनी में सामाजिक, पारिवारिक, संस्कृतिक, ऐतिहासिक, ज्ञानवर्धक, वैज्ञानिक, क्रीड़ा, स्वास्थ्य, सामान्य ज्ञान, महापुरूषों की जीवनी एवं अन्य रूचिकर विषयों से संबंधित पुस्तकें क्रय किये जाने