‘‘वामन (परिवर्तिनी) एकादषी’’ (भाद्रपक्ष शुक्ल पक्ष) दिनाँक -02/09/2017

परम् संतोष लक्ष्मीनारायण मंदिर सेवा संस्थान छिन्दवाड़ा (म.प्र.)

‘‘वामन (परिवर्तिनी) एकादषी’’ (भाद्रपक्ष शुक्ल पक्ष)    दिनाँक -02/09/2017

छिन्दवाड़ा न्यूज 4 इंडिया भगवान श्रीकृष्ण बोले- हे युधिष्ठिर! भादौ पक्ष की एकादषी का नाम वामन जंयती तथा परिवर्तिनी है। इसमें वामन भागवान की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु शयन मन्दिर में करवट बदलते हैं इस कारण इसका नाम परिवर्तिनी है। इसके महात्म्य की कथा इस प्रकार है-

त्रेता युग में प्रहलाद का पौत्र राजा बलि राज्य करता था। वह ब्राम्हाणों का सेवक था। भगवान विष्णु का भक्त था। इन्द्र आदि देवताओं का शत्रु था। अपने भुजवल से देवताओं पर विजय प्राप्त कर स्वर्ग से निकाल दिया। देवताओं को दुःखी देखकर भगवान ने वामन स्वरूप धारण किया। और बलि के द्वार पर आकर कहा- मुझे तीन पग पृथ्वी चाहिए। बलि राजा ने इस छोटी याचना को स्वीकार कर लिया और तीन पग भूमि दान का संकल्प कर दिया। वामन भगवान ने विराट रूप धारण कर संपूर्ण लोकों को दो पग में नाम लिया। तीसरा पग उठाया तो बलि ने नीचे सिर धर दिया। प्रभु ने चरण धरकर दबाया तो वह पाताल लोक में चला गया। जब भगवान चरण उठाने लगे तो बलि ने हाथ से पकड़कर कहा- इन्हें मैं मन मंदिर में धारूंगा। भगवान बोले- यदि तुम वामन एकादषी का विधि सहित व्रत करो तो मैं आपके द्वार पर कुटिया बनाकर रहूँगा । अतः बलि राजा ने वामन एकादषी का व्रत विधि सहित किया, तब से भगवान एक रूप से द्वारपाल बनकर पाताल में और एक रूप से क्षीर सागर में निवास करते हैं।

कार्यक्रम-

  1. प्रातः 8.00 बजे गौरी गणेष जी की पूजा अर्चना, कलष पूजन, गुरू पूजन, तथा श्री लक्ष्मीनारायण जी का श्यामा गाय के दूध से विष्णु सहस्त्र नाम द्वारा अभिषेक, हवन एवं आरती, प्रसाद वितरण।
  2. समय 3.00 बजे से कनक धारा स्त्रोत का पाठ, लक्ष्मी सूक्त श्री सूक्त, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ, दीपदान, संध्या आरती एवं प्रसाद वितरण।
  3. रात्रि 8.00 बजे से वामन (परिवर्तिनी) एकादषी की कथा महात्म्य वर्णन, आरती एवं फरारी खीर का भण्डारा।

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