नीलकमल फिल्म से प्रेरणा लेकर 45 साल में शिल्पकार बाबूलाल प्रजापति ने बना दीं 40 हजार मिट्टी की प्रतिमा

ब्यावरा न्यूज 4 इंडियाः मध्यप्रदेष के ब्यावरा में छिंदवाड़ा की मिट्टी से तैयार की जाती हैं गणेष प्रतिमाएं, राजस्थान तक होती है सप्लाई

नीलकमल  फिल्म से प्रेरणा लेकर 45 साल में शिल्पकार  बाबूलाल प्रजापति ने बना दीं 40 हजार मिट्टी की प्रतिमा

नीलकमल  फिल्म से प्रेरणा लेकर 45 साल में अब तक छोटी-बड़ी 40 हजारा प्रतिमाओं को आकर दे चुके हैं मध्यप्रदेष के ब्यावरा के बाबूलाल प्रजापति। पहले उनके पिता छिंदवाड़ा जिले में कोयले की खान में काम किया करते थे। उस दौरा इनके पिता और दादाजी मिट्टी की प्रतिमा बनाने का भी काम करते थे, लेकिन इसमें बाबूलाल की रूचि नहीं थी। वह कोयले की खान में ही काम करना चाहते थे। एक दिन उन्होंने नीलकमल फिल्म देखी। इसमें अभिनेता राजकुमार को मिट्टी की प्रतिमा बनाते देखा तो बाबूलाल के मल में भी मिट्टी की प्रतिमा बनाने का जुनून जाग गया और 1962 से इस काम में लगे हुए हैं। आज बाबूलाल के चैथी पीढ़ी मिट्टी की मूर्तियां बनाने का काम कर रही हैं। वे मूल रूप से मध्यप्रदेष में छिंदवाड़ा के परासिया के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि 45 सालों में कभी पीओपी की प्रतिमा नहीं बनाई, क्योंकि पीओपी की प्रतिमाओं में कैमिकल होता है जो पर्यावरण के साथ-साथ पानी को भी नुकसान पहुंचाता  है, लेकिन मिट्टी से बनी प्रतिमा में कैमिकल नहीं होता है।

ये है मान्यताः पौराणिक मान्यताओं में बताया गया कि जब देवी-देवताओं के बंटवारा चल रहा था उसी समय धरती मां ने कहा कि मुझ पर सारी धरती का बोझ है। धर्म-अधर्म, पाप अच्छे-बुरे सभी काम मेरे ऊपर ही होते हैं और मेरी पूजा तक नहीं हो रही है, तब भगवान ने धरती माता को वरदान देते हुए कहा, हे! धरती मां हम आपकी मिट्टी से अपना आकार लेंगे और फिर तुम्हारी पूजा की जाएगी तभी से यह परंपरा चली आ रही है। और मूर्तिकार मिट्टी की प्रतिमाएं बना रहे हैं।

राजस्थान तक जाती हैं प्रतिमाएंः गणेष चतुर्थी, नवरात्रि और दीपावली पर विषेष रूप से छिंदवाड़ा की सोनी मिट्टी मंगवाकर प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। इन्हें राजगढ़ जिले के ब्यावरा, राजगढ़, खिलचीपुर, माचलपुर, सिरोंज, लटेरी सहित राजस्थान के अकलेरा, मनोहरथाना से लोग लेने के लिए आते हैं।

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