[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: जब देश में किसी को चिन्ता नहीं तो मैं भी नहीं करूंगा – News 4 India

जब देश में किसी को चिन्ता नहीं तो मैं भी नहीं करूंगा

नई दिल्‍ली न्‍यूज 4 इंडिया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ मुखर रहने वाले जस्टिस जे चेलमेश्‍वर ने 12 अप्रैल को फिर कोर्टरूम से उन पर निशाना साधा। मुकद्मों के आवंटन से जुड़ी चीफ जस्टिस की शक्तियों को चुनौती देने वाली पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की याचिकापर सुनवाई से इंकार करते हुए उन्‍होंने कहा कि मैं नहीं चाहता कि एक बार फिर 24 घंटे के अंदर मेरा आदेश पलटा जाए। इससे एक दिन पहले ही चीफ जस्टिस की अध्‍यक्षता वाली बेंच ने आदेश दिया था कि मुकद्मों का बंटवारा चीफ जस्टिस का विशेषाधिकार है। वह अपने आप में एक संस्‍था हैं और उन पर अविश्‍वास नहीं दिखा सकते। जस्टिस चेलमेश्‍वर बोले-जब देश में किसी को चिंता नहीं है तो मैं भी नहीं करूंगा। जस्टिस चेलमेश्‍वर ने माइक पर कहा, दो महीनेसे यह विवाद जारी है क्‍या आप नहीं जानते कि दो माह पहले क्‍या हुआ था मैं इस मामले में नहीं पड़ना चाहता। मेरे रिटायरमेंट में कुछ दिन बचे हैं। मैं शांति से काम करना चाहता हूं उन्‍होंने कहा- बार-बार निवेदन से मेरा जवाब नहीं बदलने वाला। इस मामले पर देश में किसी को चिंता नहीं है तो मैं भी नहीं करूंगा। देश अपना रास्‍ता खुद तय करेगा। इतिहास देखते हुए जाहिर तौर पर केस नहीं सुनूंगा।

सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई के बाद दूसरे नंबर के वरिष्‍ठ जज जस्टिस चेलमेश्‍वर ने 12 जनवरी को जस्टिस रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेु के साथ मिलकर प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की थी सीजेआई की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्‍होंने लोकतंत्र को खतरे में बताया था उन्‍होंने सीजेआई को 7 पेज का पत्र भी भेजा था इसके बाद कई दिन तक नाराज रहने के बाद वह काम पर लौट आए थे। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने जस्टिस चेलमेश्‍वर और संजय किशन कौल की बेंच से कहा यह दुर्लभ स्थिति है हमने पिछले सोमवार को याचिका दायर की थी मांग की थी कि इसकी सुनवाई कॉलोजियम या सात जजोंकी बेंचकरे, जिसमें चीफ जस्टिस दीपम मिश्रा न हों। 10 दिन बाद याचिका का नंबर तक नहीं मिला है लेकिन हमारेजैसे विषय से जुड़ी एक याचिका 11 अप्रैल को चीफ जस्टिस ने न केवल सुनी, बल्कि उस पर फैसला भी सुना दिया। न्‍यायपालिका में कार्यपालिका के दखल के विरोध में जस्टिस कुरियन जोसेफ ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को एक चिट्ठी लिखी है। उन्‍होंने लिखा है कि महीनों पहले की गई कॉलोजियम की सिफारिशों पर कार्रवाई के बजाया सरकार चुपचाप फाइल दबाए बैठी है अब समय आ गया हैसुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछे। सुप्रीम कोर्ट की साख दांव पर है अगर अब भी कोर्ट चुप रहा तो इतिहास कभी माफ नहीं करेगा। उन्‍होंने जस्टिस केएम जोसफ और इंदु मल्‍होत्रा को सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्‍त करने संबंधी कॉलेजियम की सिफारिशों पर अब तक कोई फैसला नहीं होने पर यह मुद्दा उठाया हैउन्‍होंने कहा कि सबसे बड़ी अदालत के अधिकार और शक्ति को चुनौती दी जा रही है। जस्टिस जोसेफ ने 9 अप्रैल को लिखी इस चिट्ठी की कॉपी सुप्रीम कोर्ट के अन्‍य जजों को भी भेजी है।

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