[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: सिर्फ यहीं नहीं अन्‍य जिलों में भी चल रहा गोरखधंधा | News 4 India

सिर्फ यहीं नहीं अन्‍य जिलों में भी चल रहा गोरखधंधा

जबलपुर न्‍यूज 4 इंडिया। चिल्‍ड्रन बुक हाउस का गोरखधंधा केवल जबलपुर भर में नहीं फैला है बल्कि छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला सहित रीवा तक पसरा हुआ है। एक सत्र में सीबीएच 25 करोड़ से अधिक की शुद्ध कमाई का नया फंडा निकालते हुए देवसिद्ध पब्लिकेशन के नाम पर खुद किताबें छापी हैं और ये किताबें सिर्फ और सिर्फ उसकी ही दुकानों पर उपलब्‍ध होती हैं। इसलिए किताबों का पूरा सेट अन्‍य पु‍स्‍तक विक्रेताओं के यहां उपलब्‍ध नहीं हो पाता है।

छोटे जिलों में तो अभिभावकों को पक्‍का बिल भी पुस्‍तक विक्रेता नहीं थमाता है कच्‍ची रसीद देकर दो नंबर में सीबीएच करोड़ों की रकम का हेरफेर कर रहा है अवैध कमाई का ये धंधा सालों से चला आ रहा है। यदि इंकम टैक्‍स विभाग पुस्‍तक विक्रेता की कमाई का एक-एक पैसे का हिसाब मांगे तो अ‍सलियत अपने आप सामने आ जाएगी कि किस तरह मासूम अभिभावकों की मजबूरी का फायदा पुस्‍तक विक्रेता द्वारा उठाया जा रहा है। और निजी स्‍कूलों से सांठगांठ कर शिक्षा को व्‍यापार बना दिया गया है।

अहमदाबाद से हो रही छपाई

गले तक कमाई करने के लालच में सीबीएच ने प्रशासन से छुपाकर गुजरात के अहमदाबाद में देवसिद्ध पब्लिकेशन प्रायवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी शुरू की और यहां से कुछ पुस्‍तकों की छपाई कराई। बाद में शहर सहित आसपास के जिलों के स्‍कूलों से सांठगांठ कर पुस्‍तकों के सेट में इन किताबों को शामिल कर दिया गया। अब छोटे विक्रेताओं के सामने समस्‍या यह आ रही है कि उनके पास इन किताबों के न होने से पूरा सेट तैयार नहीं हो पा रहा है जिससे अभिभावक किताबें लेने से इंकार कर देते हैं पीडि़त अन्‍य विक्रेताओं के अनुसार जब उन्‍होंने अहमदाबाद फोन कर उस पब्लिशर्स से किताबें मंगानी चाहीं तो उन्‍हें साफ इंकार कर दिया गया। इससे ही सिर्फ एक विक्रेता की मनमानी की पोल खुल कर सामने आ रही है।

सीबीएच की मोनोपॉली कक्षा 1 से कक्षा 8 तक जारी है क्‍योंकि कक्षा 8 तक सीबीएसई पैटर्न पर स्‍कूलों का संचालन होता है स्‍कूल अपने अनुसार किताबें रख सकते हैं जिसका भरपूर फायदा सीबीएच उठा रहा है। इसमें स्‍कूलों की सांठगांठ है, जिसे जानते हुए भी जिला प्रशासन अपनी आंखे बंद कर बैठा है।

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