राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिये आदर्श आचार संहिता का प्रावधान

छिन्दवाडा/ 08 अक्टूबर 2018/ भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा निर्वाचन-2018 के अंतर्गत राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिये आदर्श आचार संहिता का प्रावधान किया गया है । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री वेद प्रकाश द्वारा आयोग के निर्देशों के परिपालन में जिले के सभी राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों से इस आदर्श आचार संहिता का पालन करने का अनुरोध किया गया हैं ।

      कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री वेद प्रकाश ने बताया कि विधानसभा निर्वाचन-2018 के अंतर्गत राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के साधारण आचरण के अनुसार किसी भी दल या अभ्यर्थी को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जो विभिन्न जातियों और धार्मिक या भाषायी समुदायों के बीच विद्यमान मतभेदों को बढ़ाये या घृणा की भावना उत्पन्न करें या तनाव पैदा करें । जब अन्य राजनैतिक दलों की आलोचना की जाये, तो वह उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पूर्व रिकार्ड और कार्य तक ही सीमित होनी चाहिये । यह भी आवश्यक है कि व्यक्तिगत जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना नहीं की जानी चाहिये, जिनका संबंध अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक क्रियाकलाप से न हो । दलों या उनके कार्यकर्ताओं के बारे में कोई ऐसी आलोचना नहीं की जानी चाहिये, जो ऐसे आरोपों पर जिनकी सत्यता स्थापित न हुई हो या जो तोड़-मरोड़कर कही गई बातों पर आधारित हों । मत प्राप्त करने के लिये जातीय या साम्प्रदायिक भावनाओं की दुहाई नहीं दी जानी चाहिये । मस्जिदों, गिरजाघरों, मंदिरों या पूजा के अन्य स्थानों का निर्वाचन प्रचार के मंच के रूप में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिये । सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कार्यों से ईमानदारी के साथ बचना चाहिये, जो निर्वाचन विधि के अधीन ‘भ्रष्ट आचरण’ और अपराध हैं जैसे कि मतदाताओं को रिश्वत देना, मतदाताओं को डराना/धमकाना, मतदाताओं का प्रतिरूपण, मतदान केंद्र के 100 मीटर के भीतर मत याचना करना, मतदान की समाप्ति के लिये नियत समय को खत्म होने वाली 48 घंटे की अवधि के दौरान सार्वजनिक सभायें करना और मतदाताओं को वाहन से मतदान केंद्रों तक ले जाना और वहां से वापस लाना ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री वेद प्रकाश ने कहा है कि सभी राजनैतिक दलों या अभ्यर्थियों को इस बात का प्रयास करना चाहिये कि वे प्रत्येक व्यक्ति के शांतिपूर्ण और विघ्नरहित घरेलू जिंदगी के अधिकार का आदर करें, चाहे वे उसके राजनैतिक विचारों या कार्यों के कितने ही विरूध्द क्यों न हों । व्यक्तियों के विचारों या कार्यों का विरोध करने के लिये उनके घरों के सामने प्रदर्शन करने या धरना देने के तरीकों का सहारा किसी भी परिस्थिति में नहीं लेना चाहिये । किसी भी राजनैतिक दल या अभ्यर्थी को ध्वजदंड बनाने, ध्वज टांगने, सूचनायें चिपकाने, नारे लिखने आदि के लिये किसी भी व्यक्ति को भूमि, भवन, अहाते, दीवार आदि का उसकी अनुमति के बिना उपयोग करने की अनुमति अपने अनुयायियों को नहीं देनी चाहिये । इसी प्रकार राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि उनके समर्थक अन्य दलों द्वारा आयोजित सभाओं-जुलूसों आदि में बाधायें  उत्पन्न न करें या उन्हें भंग न करें । एक राजनैतिक दल के कार्यकर्ताओं या शुभचिंतकों को दूसरे राजनैतिक दल द्वारा आयोजित सार्वजनिक सभाओं में मौखिक रूप से या लिखित रूप से प्रश्न पूछकर या अपने दल के पर्चे वितरित करके गड़बड़ी पैदा नहीं करनी चाहिये । किसी दल द्वारा जुलूस उन स्थानों से होकर नहीं ले जाना चाहिये, जिन स्थानों पर दूसरे दल द्वारा सभायें की जा रही हों । एक दल द्वारा लगाये गये पोस्टर दूसरे दल के कार्यकर्ताओं द्वारा हटाये नहीं जाने चाहिये ।

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