[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: जुगाड़ से बची जान – News 4 India

जुगाड़ से बची जान

कानपुर न्‍यूज 4 इंडिया। आईआईटी कानपुर के इंजीनियरिंग छात्र कार्तिकेय मंगलम की जुगाड़ टेक्‍नोलॉजी ने फ्लाइट में एक यात्री की जान बचा ली। दो रोज पहले कार्तिकेय जिस फ्लाइट में सफर कर रहे थे, उसी में एक यात्री का शुगर लेवल गड़बड़ा गया। पैसेंजर अपनी इंसुलिन पेन घर पर ही भूल आया था। ऐसे में कार्तिकेय ने फ्लाइट में मौजूद डॉक्‍टर की इंसुलिन पेन ली, उसमें पेन की स्प्रिंग डाली और इसे इस्‍तेमाल लायक बना दिया। कार्तिकेय के कारनामे पर उनके इंस्‍टीट्यूट को भी नाज है। ऑ‍फीशियल ट्विटर अकाउंट पर आईआईटी-कानपुर ने अपने होनहार की सूझ-बूझ का पूरा हिस्‍सा साझा किया है। असल में मामला जेनेवा से नई दिल्‍ली की एक फ्लाइट का है कार्तिकेय जेनेवा से ही इस फ्लाइट में सवार हुए थे मास्‍को एयरपोर्ट से एक पैसेंजर थॉमस भी फ्लाइट में सवार हुए। फ्लाइट को यहां से उड़ान भरे 5 घंटे हुए थे कि थॉमस की तबीयत बिगड़ने लगी। शुगर लेवल गड़बड़ होने की वजह से उन्‍हें काफी बैचेनी होने लगी, चक्‍कर आने लगे। पता चला कि थॉमस अपना इंसुलिन पेन तो साथ लाना ही भूल गए हैं। फ्लाइट में मौजूद डॉक्‍टरों ने प्राथमिक उपचार किया, पर बात नहीं बनी। डॉक्‍टरों के पास इंसुलिन पेन तो था, लेकिन इसमें थॉमस की कारट्रिज(निडल) फिट नहीं हो रही थी। इमरजेंसी लेडिंग ही एकमात्र उपाय बचा था नजदीकी हवाईअड्डे पर लैडिंग में भी एक घंटे का समय लग जाता। इस बीच थॉमस बेहोश भी हो गए। ऐसे में कार्तिकेय ने सूझ-बूझ दिखाई। उन्‍होंने डॉक्‍टरों से उनकी इंसुलिन पेन ली। फ्लाइट के वाई-फाई का इस्‍तेमाल कर इंटरनेट पर देखा कि इंसुलिन पेन की बनावट कैसी होती है और ये काम कैसे करती है। कार्तिकेय को समझ आया कि इंसुलिन पेन में एक स्प्रिंग की कमी है। ये मिल जाए तो इंसुलिन पेन को थॉमस के इस्‍तेमाल लायक बनाया जा सकता है। उन्‍होंने फौरन फ्लाइट में मौजूद लोगों से उनके पेन मांगे। पेन की रिफिल के साथ लगने वाली स्प्रिंग निकाली और इसे इंसुलिन पेन में फिट कर दिया। अब इंसुलिन पेन में थॉमस की कारट्रिज फिट हो गई। और डॉक्‍टरों ने इससे थॉमस को डोज देकर उनकी जान बचाई।

कार्तिकेय मंगलम बताते हैं कि मैंने इंसुलिन पेन को थॉमस के इस्‍तेमाल लायक बनाने के लिए जो तरीका इस्‍तेमाल किया, वो इंजीनियरिंग बेसिक्‍स ही है हमें इंजीनियरिंग फर्स्‍ट ईयर में ही ये बेसिक्‍स सिखाए गए थे इससे बड़ी बात कोई नहीं हो सकती कि आपकी पढ़ाई किसीकी जान बचाने में काम आए। थॉमस को दिल्‍ली में फ्लाइट लैंड होने के बाद कार्तिकेय ने ही यहां एक हॉस्पिटल में भी भर्ती कराया। थॉमस मूल रूप से एम्‍सटर्डम के रहने वाले हैं वहां वो रेस्‍टोरेंट और बेकरी चलाते हैं जान बचाने वाले कार्तिकेय को उन्‍होंने शुक्रिया कहा। साथ ही एम्‍सटर्डम घूमने आने और उनके रेस्‍टारेंट में खाना खाने का न्‍यौता भी दिया है।

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