[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: ये ले चुके कइयों की जान – News 4 India

ये ले चुके कइयों की जान

नागपुर न्‍यूज 4 इंडिया। शासकीय चिकित्‍सा महाविद्यालय एवं अस्‍पताल में वेंटिलेटर की कमी के कारण मरीजों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है यहां तक की गंभीर मरीज को एम्‍बु लगाकार मरीज में जान फूंकने की जिम्‍मेदारी परिजनों को दे दी जाती है। परिजनों को चौबीसों घंटे उसे धीरे-धीरे दबाना पड़ता है। जो संभव नहीं है पर परिजन मजबूर हो जाते हैं मेडिकल आईसीयू के अच्‍छे वेंटिलेटर ट्रामा सेंटर में शिफ्ट कर दिए गए हैं।

कोई नियम नहीं

वर्तमान में मेडिकल के अतिदक्षता विभाग में 9 वेंटिलेटर है जिसमें से एक खराब पड़ा है। फिलहाल आईसीयू में सिर्फ 8 वेंटिलेटर काम कर रहे हैं पहले आईसीयू में वेंटिलेटर की संख्‍या अधिक थी चूंकि आईसीयू में बेड की संख्‍या के अनुपात में वेंटिलेटर लगाने का कोई नियम नहीं है इस वजह से इस ओर किसी का ध्‍यान नहीं जाता है। इससे आईसीयू के वेंटिलेटर ट्रामा केयर सेंटर में शिफ्ट करने पर किसी ने आपत्ति नहीं जताई।

एक डॉक्‍टर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उनके आईसीयू के नए और अच्‍छे वेंटीलेटर को ट्रामा में शिफ्ट कर दिया है इससे आईसीयू में अब वेंटिलेटर की समस्‍या और गहरा गई है। इतना ही नहीं, मेडिकल आईसीयू में कभी भी पूछने पर वेंटिलेटर नहीं मिलता है। जबकि ट्रामा केयर सेंटर में लगभग हमेशा ही वेंटिलेटर खाली रहते हैं।

मेडिकल में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को पहले ही बोल दिया जाता है कि वेंटिलेटर नहीं हैं चूंकि उनके पास कोई विकल्‍प नहीं होता इसलिए मन मारकर रह जाते हैं।

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