[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: जजों की नियुक्ति नहीं है संपत्ति का बंटवारा | News 4 India

जजों की नियुक्ति नहीं है संपत्ति का बंटवारा

कोच्चि न्‍यूज 4 इंडिया। केरल हाईकोर्ट के जज जस्टिस बी कमाल पाशा ने हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति के तौर-तरीकों की आलोचना की है उन्‍होंने कहा कि जजों की नियुक्ति कोई पारिवारिक संपत्ति नहीं है जिसका बंटवारा करना है। अपने रिटायरमेंट की पूर्व संध्‍या पर 24 मई को आयोजित फुट कोर्ट रेफरेंस में जस्टिस पाशा ने कहा मैं नहीं मानता कि जज का पद हर धर्म, जाति और उप जाति को देना चाहिए। उन्‍होंने कहा मैंने खबरें पढ़ी हैं कि बार से कुछ लोगों को जज बनाने की सिफारिश की गई है अगर मीडिया में आए नाम सही हैं तो मैं दावे से कह सकता हूं कि इस कोर्ट के ज्‍यादातर जज इनमें से कई का चेहरा भी देखना पसंद नहीं करेंगे। क्‍या यह न्‍यायपालिका के लिए सही है। बार में कई योग्‍य वकील हैं, जिन्‍हें जज बना सकते हैं उन्‍होंने कहा कि अक्षम लोग चुनने से सिस्‍टम पर ही सवाल उठेंगे। उन्‍होंने कहा, न्‍याय एक दैवीय कार्य है जो व्‍यक्ति इसके लिए चुना जाना है उसमें क्षमता होनी चाहिए। रिटायरमेंट के बाद सरकारी पदों की इच्‍छा रखने वाले जजों पर निशाना साधते हुए उन्‍होंने कहा अदालतों खासकर हाईकोर्ट में ज्‍यादातर मामलोंमें सरकार एक पक्ष होती है।

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