हर कोई चाहेगा ऐसी नौकरी, इस्तीफे के दो साल बाद भी मिल रहा वेतन

हर कोई चाहेगा ऐसी नौकरी, इस्तीफे के दो साल बाद भी मिल रहा वेतन

महासमुंद न्‍यूज 4 इंडिया। महासमुंद विकासखंड का शिक्षा विभाग अपने कारनामों के लिए जिले ही नहीं अपितु प्रदेश में कुख्यात है। कभी वेतन के एवज में शिक्षाकर्मियों से बीईओ द्वारा 500-500 रुपए की मांगने की शिकायत सामने आती है, तो कभी कार्यालय में तंत्र-मंत्र कराने की घटनाएं सुनने में आ चुकी है।

अब एक नया मामला सामने आया है जिसमें ब्लॉक शिक्षा विभाग के अमले ने 15 अप्रैल 2015 को नौकरी से त्यागपत्र दे चुके सहायक शिक्षक पंचायत के खाते में जनवरी 2017 तक वेतन जमा कराया है।

मामला महासमुंद विकासखंड छिलपावन संकुल के शासकीय प्राथमिक शाला बावनकेरा का है। यहां सहायक शिक्षक पंचायत धनंजय निर्मलकर पदस्थ था। जो अब पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक है।

धनंजय ने 15 अप्रैल 2015 को शिक्षकीय नौकरी से इस्तीफा दिया। इस्तीफे के बाद से प्रधानपाठक ने वेतन देयक में उनका नाम नहीं भेजा। बावजूद बीईओ कार्यालय से धनंजय निर्मलकर इंप्लॉय कोड 580101220 के एसबीआई खाता क्रमांक 30278453916 पर हर महीने 11 हजार 980 रुपए वेतन जमा किया जाता रहा। जनवरी 2017 तक धनंजय के खाता में वेतन जमा कराया गया है। जमा वेतन लाखों में है।

धनंजय का कहना मां के नाम पर है खाता

इस संबंध में धनंजय निर्मलकर से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि उनकी गलती नहीं है। उन्होंने बीईओ को एक बार मौखिक तौर पर अवगत कराया था। निर्मलकर ने यह भी कहा कि वेतन जिस खाता में जमा किया गया वह खाता उनकी मां के नाम पर है।

निर्मलकर ने कहा कि यह पैसा उन्होंने उपयोग में नहीं लाया है। बहरहाल इस बात की जांच होनी है कि धनंजय की मां के नाम के खाते में बीईओ कार्यालय ने वेतन क्यों डाला। धनंजय की अनुपस्थिति के दौरान का भी वेतन भुगतान किया गया है।

– पुलिस उपनिरीक्षक की नौकरी लगने पर 15 अप्रैल 2015 को उन्होंने सेवा से त्यागपत्र दिया। बाद से हर महीने के वेतन देयक में उनका नाम नहीं भेजा गया। भुगतान देयक में हर महीने प्रधानपाठक के अलावा सरपंच, सचिव का भी हस्ताक्षर होता है। अब जनवरी 2017 तक इनका वेतन कैसे निकला यह बीईओ कार्यालय ही बता पाएगा। – रिजवाना अली, प्रधानपाठक शासकीय प्राथमिक शाला बावनकेरा वर्जन

– हर महीने प्रधानपाठक पेय बिल बनाकर संकुल को देते हैं। बिल में सरपंच-सचिव का भी हस्ताक्षर होता है। कोई शिक्षक त्यागपत्र दे दिया है तो इसकी जानकारी बीईओ कार्यालय को रहती है। तभी उसे भारमुक्त किया जाता है। इस्तीफे के बाद भी वेतन जारी करना एचएम, स्कूल, संकूल की गलती नहीं है। यह बीईओ कार्यालय की ही चूक है। – चमनलाल सोनी पूर्व संकुल समन्वयक छिलपावन

– त्यागपत्र देने के बाद भी मेरे खाते में सैलरी आ रही है तो यह मेरी गलती नहीं है। वैसे खाता मेरी मां के नाम पर है। मुझे जब पता लगा तब मौखिक तौर पर एक बार बीईओ को कहा था। खाते की जांच करा लो जितनी भी सैलरी आई है मैंने उसका आहरण नहीं किया है। लौटाने को तैयार हूं।  धनंजय निर्मलकर, पूर्व सहायक शिक्षक व उपनिरीक्षक पुलिस

– यह बड़ी लापरवाही है। मेरे संज्ञान में यह मामला आया है। मामले की जांच कर संबंधित से रिकवरी लेंगे और जिम्मेदार स्टॉफ पर कार्रवाई के लिए वरिष्ट अधिकारी को अवगत कराएंगे।  गजेंद्र धु्रव, बीईओ महासमुंद

– अप्रैल 2015 में त्यागपत्र देने के बाद जनवरी 2017 तक वेतन जारी किया जाना गंभीर मामला है। संचालक से इस मामले की जांच कराएंगे। जिनकी भी लापरवाही है कार्रवाई की जाएगी। – विकासशील, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग छग रायपुर

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