[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: कानून मंत्रालय को कोतवाली बनाना चाहती है केंद्र सरकार | News 4 India

कानून मंत्रालय को कोतवाली बनाना चाहती है केंद्र सरकार

लखनऊ न्‍यूज 4 इंडिया।  बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ न्यायपालिका को बार-बार अपमानित करने व उसे नीचा दिखाने को लेकर आलोचना की है। मंगलवार को एक लेटर जारी करते हुए मायावती ने कहा कि कार्यपालिका का न्यायपालिका के साथ ऐसा विद्वेषपूर्ण बर्ताव व सही नहीं है।

– विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ देश की न्यायपालिका के प्रति यह केन्द्र सरकार की हठधर्मी व निरंकुशता का द्योतक है। स्वंय कानून मंत्री व अन्य केन्द्रीय मंत्रियों द्वारा भी बार-बार सार्वजनिक तौर पर यह कहे जाने पर कि केन्द्रीय कानून मंत्रालय कोई ‘डाकघर’ नहीं है जो जजों की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट के कोलजियम की सिफारिश पर आंख बन्द करके अमल करता रहे।
– मायावाती ने कहा कि केन्द्र सरकार के इस प्रकार के दुखद रवैये के कारण न्यायपालिका आज अभूतपूर्व संकट झेल रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि केन्द्र व राज्यों में जनविरोधी व संविधान की पवित्र मंशा के विरूद्ध काम करने वाली बीजेपी की वर्तमान सरकारों केन्द्र व राज्य सरकारों के खिलाफ न्यायपालिका ही एकमात्र उम्मीद की किरण है।

– मायावती जी ने कहा कि केन्द्र सरकार के नीति-निर्धारण मामलों के साथ-साथ न्यायपालिका में भी समाज के बहुत बड़े तबके अर्थात दलितों, आदिवासियो, पिछड़े वर्गों व धार्मिक अल्पसंख्यकों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण भी संविधान को उसकी सही जनहिताय की मंशा के अनुरूप देश में आज तक ढाला नहीं जा सका है जिसके सम्बन्ध में कोई अच्छी सुधार की उम्मीद खासकर बीजेपी की वर्तमान सरकारों से कतई नहीं की जा सकती है क्योंकि इनकी नीयत व नीति पूर्ण रूप से जनहिताय ना होकर घोर जातिवादी, साम्प्रदायिक व विद्वेषपूर्ण लगातार ही बनी हुई है।

न्याय की आखिरी उम्मीद है कोर्ट
-जहां से देश की दुःखी जनता के साथ-साथ विपक्षी पार्टियों के लिए भी न्याय की आखिरी आस बंधी हुई है। बीजेपी के मंत्रीगण अगर न्यायपालिका का पूरा-पूरा आदर-सम्मान नहीं कर सकते तो कम-से-कम उसका अपमान भी ना करें। केन्द्र सरकार का कानून मंत्रालय अगर ‘पोस्ट आफिस’ (डाकघर) नहीं है तो उसे पुलिस थाना (कोतवाली) बनने का भी अधिकार कानून व संविधान ने नहीं दिया है। यह बात नरेन्द्र मोदी सरकार को विनम्रता के साथ स्वीकार करनी चाहिए और न्यायपालिका को बात-बात पर अपमानित करने के अपने अलोकतांत्रिक रवैये में सही सुधार अवश्य लाना चाहिए। यही देशहित में है।
– केन्द्र सरकार के मंत्री व बीजेपी के नेतागण बार-बार यह कहते हैं कि सन् 2016 में 126 जजों की नियुक्ति करके केन्द्र सरकार ने कमाल का काम किया है, लेकिन पहले 300 से ज्यादा जजों के पदों को खाली लटकाए रखना और फिर उसके बाद 126 जजों की नियुक्ति करना यह कौन सा जनहित व देशहित का काम है?

क्या कहा था कानून मंत्री ने
– केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाल ही मोदी सरकार के चार साल की उपलब्धियों गिनाते हुए कहा था कि मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का पूरा सम्मान करती है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह ‘पोस्ट ऑफिस’ की भूमिका में है।

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