[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: 65 साल में पहली बार उ.कोरिया-अमेरिका में करार – News 4 India

65 साल में पहली बार उ.कोरिया-अमेरिका में करार

 सिंगापुर  न्‍यूज 4 इंडिया।    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोन-उन के बीच बातचीत कामयाब होने पर मंगलवार को दुनिया ने राहत की सांस ली है। यह बातचीत करीब 90 मिनट चली। इसमें 38 मिनट की निजी बातचीत भी शामिल है। इसमें ट्रम्प ने किम को पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए राजी कर लिया। इस पर जल्द काम शुरू हो जाएगा। बदले में अमेरिकी ने उसे सुरक्षा का भरोसा दिया। इसके लिए दोनों नेताओं ने एक करार पर हस्ताक्षर किए। इस तरह अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच पिछले 65 साल बंद बातचीत फिर से शुरू हो गई। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहॉवर (1953) से लेकर बराक ओबामा(2016) तक 11 अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने उत्तर कोरिया का मसला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी थी।

ट्रम्प ने कहा- दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक समस्या का हल हो गया

– ट्रम्प और किम के बीच यह मुलाकात मंगलवार को सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप के कापेला होटल में हुई। ट्रम्प ने कहा कि किम के साथ मुलाकात बहुत अच्छी रही। हम दोनों के बीच बेहतर रिश्ते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वे मिलकर बड़ी समस्या को हल करेंगे। ट्रम्प ने कहा, “हमें कामयाबी मिलेगी और हमारे रिश्ते भी शानदार रहेंगे।”

– दोनों देशों के बीच हुए करार के मुताबिक उत्तर कोरिया परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने के लिए तैयार हो गया है।

– ट्रम्प ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक समस्या का हल हो गया है। इसके लिए मैं किम को धन्यवाद देता हूं। यह बहुत कठिन समय था। अब दोनों देश मिलकर काम करेंगे और एक-दूसरे का सम्मान करेंगे।
– ट्रम्प से पूछा गया कि क्या वे किम को व्हाइट हाउस आने का न्योता देंगे, इस पर उनका जवाब आया- बिल्कुल।

किम ने कहा- दुनिया बड़ा बदलाव देखेगी
– करार पर दस्तखत करने के बाद किम ने कहा कि दुनिया एक बड़े बदलाव देखेगी। हमने अतीत को छोड़ने का फैसला किया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि यहां तक पहुंचना आसान नहीं रहा। पुरानी मान्यताओं ने रोड़ा अटकाने की कोशिश की। लेकिन हम इससे उबरे और आज यहां हैं। मीडिया ने जब किम से पूछा कि क्या उन्होंने एटमी साइट को बंद कर दिया तो वे सिर्फ मुस्कराते रहे।

– उन्होंने कहा कि लोगों को ये मुलाकात किसी साइंस फिक्शन फिल्म की तरह लग सकती है।

ट्रम्प के हाथ मिलाने में नहीं दिखी उनकी स्टाइल

– 71 साल के डोनाल्ड ट्रम्प और 34 साल के किम जोंग-उन के बीच इस मुलाकात में कैमिस्ट्री अच्छी दिखी। दोनों ने पहली मुलाकात में करीब 12 सेकंड तक हाथ मिलाया। लेकिन जानकार शुरुआत में इसे गर्मजोशी की मुलाकात नहीं मान रहे हैं। क्योंकि ट्रम्प किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या अफसर से मिलते वक्त उनसे देर तक हाथ मिलाते हैं और सामने वाले का हाथ जोर से हिलाते हैं। हाल में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से उन्होंने 19 सेकंड तक हाथ मिलाया था।

– किम से मुलाकात में उतनी गर्मजोशी नजर नहीं आई। किम ही ट्रम्प का हाथ जोर से हिलाते दिखे।

– ट्रम्प ने कहा कि किम के साथ मुलाकात बहुत अच्छी रही। उत्तर कोरिया के साथ शानदार रिश्ते रहेंगे।

ट्रम्प ने पहनी लाल टाई तो किम मुलाकात के वक्त से 7 मिनट पहले पहुंचे

– उत्तर कोरियाई मीडिया के मुताबिक, किम ट्रम्प के सम्मान में मुलाकात के वक्त से 7 मिनट पहले ही पहुंच गए थे। उधर, ट्रम्प ने किम के सम्मान में इस बैठक के लिए लाल टाई पहनी। इसकी वजह है कि उत्तर कोरिया के लोग लाल रंग को बेहद पसंद करते हैं।

11 अमेरिकी राष्ट्रपति नाकाम, लेकिन ट्रम्प को मिली कामयाबी

– ट्रम्प अमेरिका के 12वें ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्हें उत्तर कोरिया के साथ विवाद दूरे करने में कामयाबी मिली। अमेरिका उत्तर कोरिया के साथ विवाद को खत्म करने के लिए 65 साल से कोशिश कर रहा था। इस दौरान अमेरिका के 11 राष्ट्रपति (आइजनहॉवर से लेकर जॉन एफ केनेडी, लिंडन जॉनसन, रिचर्ड निक्सन, गेराल्ड फोर्ड, जिमी कार्टर, रोनाल्ड रीगन, जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश, बिल क्लिंटन, जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा) उत्तर कोरिया के साथ कोई हल निकालने में नाकाम रहे।

– 1953 में दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच तीन साल चली जंग खत्म हुई थी। इसमें 9 लाख सैनिकों समेत 25 लाख लोग मारे गए थे। इसके बाद से उत्तर कोरिया और अमेरिका में बातचीत बंद थी।

– 1954 में जेनेवा कॉन्फ्रेंस में रूस (तब सोवियत संघ), चीन, अमेरिका, यूके और फ्रांस कोरिया की समस्या का हल निकालने के लिए इकट्ठा हुए। उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहॉवर थे। मीटिंग में अमेरिकी विदेश मंत्री रहे जॉन फॉस्टर डलेस का अड़ियल रुख रहा। उन्होंने चीन के साथ सीधे बात करने से मना कर दिया। जिसके चलते कोई नतीजा नहीं निकल पाया। इसके बाद फिर हर दशक में कोशिशें होती रहीं।

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