[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: रिजर्व बैंक के गवर्नर आखिर क्‍यों हैं परेशान | News 4 India

रिजर्व बैंक के गवर्नर आखिर क्‍यों हैं परेशान

नई दिल्‍ली न्‍यूज 4 इंडिया। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने फिर कहा है कि सरकारी बैंकों पर निगाह रखने के लिए और अधिकारों की जरूरत है पटेलने 12 जून को वित्‍त पर संसद की स्‍थायी समिति के सामने यह बात कही। उन्‍होंने ज्‍यादा अधिकारों की बात ऐसे समय दोहराई है जब सरकारी बैंक भारी-भरकम एनपीए से जूझ रहे हैं। कांग्रसे सांसद वीरप्‍पा मोइली की अध्‍यक्षता वाली समिति ने उनसे बैंक धोखाधड़ी, नकदी संकट और अन्‍य मसलों के बारे में भी सवाल पूछे।

उर्जित पटेल ने कहा कि अभी रिजर्व बैंक का सरकार बैंकों पर अपर्याप्‍त नियंत्रण है ऑडिट के लिहाज से देखें तो केंद्रीय बैंक के लिए हर बैंक की प्रत्‍येक शाखा पर नजर रख पाना संभव नहीं है इन पर पर्याप्‍त नियंत्रण रखने के लिए रिजर्व बैंक को और अधिकार और शक्तियों की जरूरत है।

बैंकिंग सेक्‍टर का एनपीए दिसंबर 2017 में 8.31 लाख करोड़ रूपए तक पहुंच गया था वर्ष 2017-18 में 19 सरकारी बैंकों का संयुक्‍त घाटा 87,357 करोड़ रूपए रहा है इसमें नीरव मोदी-मेहुल चौकसी की धोखाधड़ी का शिकार बने पंजाब नेशनल बैंक को सबसे अधिक 12,283 करोड़ रूपए का घाटा हुआ है। पटेल ने बताया कि दिवालिया कानून के तहत कार्रवाई से एनपीए की समस्‍या में सुधार आया है।

पटेल ने कहा सरकारी बैंकों के बोर्ड में आरबीआई का कोई प्रतिनिधि नहीं होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि नॉमिनी डायरेक्‍टर सहित सभी डायरेक्‍टरों का मुख्‍य काम यह सुनिश्चित करना है कि बैंकों का काम प्रोफेशनल तरीके से चले। आरबीआई इस मुद्दे पर वित्‍त मंत्रालय से भी बात कर रहा है।

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