[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: अपने पैसे से सामान लगाया था, निकाल ले गया | News 4 India

अपने पैसे से सामान लगाया था, निकाल ले गया

लखनऊ न्‍यूज 4 इंडिया।  सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकारी बंगले में तोड़फोड़ के मामले में बुधवार को सफाई दी। उन्होंने कहा, “मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। बंगले के जो फोटो दिखाए जा रहे हैं, उसमें सच्चाई छुपाई जा रही है। मैं सिर्फ वही सामान लेकर गया हूं, जिन्हें मैंने अपने पैसे से लगाया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में हुए चुनावों में हार पर बौखलाई हुई है और ऐसे आरोप लगा रही है। बता दें कि अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2 जून को सरकारी बंगला खाली किया था।

अखिलेश यादव ने दिखाई टोंटी, कहा- इसे लौटाने आया हूं

अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि मैं टोंटी लेकर आया हूं, जो गायब हो गई थी। वही लौटाने आया हूं। सीएम आवास में भी मेरा बहुत सारा सामान है, वो सब लौटा दें सीएम। लोग प्यार में अंधे होते हैं, लेकिन गुस्से में कितने अंधे होते हैं, वो अब दिख रहा है।

– “पिछले सवा साल में मेरे घर एक हजार बच्चे आए होंगे। उन सबसे पूछो कि कहां है स्वीमिंग पूल। जो स्वीमिंग पूल है ही नहीं, उस पर खबर बना दी गई कि पूल पर मिट्टी डाल दी गई।”

– “मैं प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहता, लखनऊ में ही रहना चाहता हूं। जो सामान मेरा था, उसे ले गया।”

– “आज भी वहां पर जो वुडन फ्लोरिंग लगी है, मंदिर है और अन्य चीजें हैं, मैंने अपने पैसे से लगवाई हैं।”
– तोड़फोड़ की खबरों पर अखिलेश यादव ने कहा कि बंगला खाली करने के बाद सीएम योगी के ओएसडी अभिषेक और आईएएस अफसर मृत्युंजय नारायण वहां गए थे। मैं पूछना चाहता हूं कि वह क्या करने गए थे? ये लोग फोटोग्राफर लेकर गए थे।

मैंने अपने पैसे अपनी जरूरतें पूरी कीं

अखिलेश ने कहा,जब किसी घर में इंसान रहने लगता है, तो उससे लगाव हो जाता है। फिर घर को अपने हिसाब से बनाता है। मैनें अपने पैसे से अपनी जरूरतें पूरी कीं। उस वक्त ऐसी व्यवस्था थी कि पूर्व सीएम को सरकारी आवास मिलता है तो वह अपने हिसाब से उसमें बदलाव कर सकता है।”

– प्रमुख सचिव पर रिश्वत के आरोप के मामले में अखिलेश ने कहा कि पुलिस ने एक ही दिन में आरोपी को मानसिक रूप से बीमार बना दिया। उन्होंने सरकार को छोटा दिल और मानसिकता वाला बताते हुए कहा कि एक्सप्रेस वे और मेट्रो हमने दी लेकिन सरकार ने कभी हमारा नाम नहीं लिया। ये इसलिए ऐसा कर रहे हैं क्योंकि गोरखपुर और फूलपुर की हार स्वीकार नहीं कर पा रहे।

क्या बोली योगी सरकार?

– सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, “खिसयानी बिल्ली खम्बा नोंचे वाली कहावत कहूंगा। गवर्नर साहब ने जो चिट्ठी लिखी, वह सबने पढ़ी है। चिट्ठी में लिखा है कि जिस मकान में अखिलेश यादव रह रहे थे वो सरकारी संपत्ति थी। शायद उनको यह अहसास हो गया था अगली बार वो सीएम नहीं रहेंगे।”
– “”जिन प्रश्नों को उन्होंने उठाया था उस पर भी मैं एक मुहावरा कहूंगा। जिस अंदाज में आज वो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे उससे यह कहां जा सकता था की “चोर की दाढ़ी में तिनका” जैसा था। आज पूर्व सीएम ने स्वीकार किया मैंने बंगला बनवाया इसलिए इनकम टैक्स वालों को देखना चाहिए कि टैक्स सही से मिल रहा है कि नहीं।”

मंत्री ने की जांच की मांग
– राज्य के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर स्वतंत्र देव सिंह ने कहा, “एसी निकाल लिए गए हैं, टाइल्स भी गायब हैं। आखिर ये सरकार संपत्ति है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है। इस मामले की पूरी जांच की जानी चाहिए।”

क्या है मामला?

– बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्यसंपत्ति के दिए 15 दिन के समय में अखिलेश यादव ने दो जून को सरकारी बंगला खाली किया था। बंगले में तोड़फोड़ का मामला सामने आने के बाद अब राज्य संपत्ति विभाग ने इन बंगलों के सामान की सूची बनानी शुरू कर दी है। इनका रिकॉर्ड से मिलान कराया जाएगा।
-किसी भी किस्म की गड़बड़ी मिलने पर आवंटियों को नोटिस जारी किया जाएगा। इनमें मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह और मायावती के बंगले हैं।
-इन सभी ने आवास खाली करने के बाद चाबी राज्य संपत्ति विभाग को सौंप दी है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का सरकारी आवास अभी खाली नहीं हुआ है।

 

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