[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: मलय श्रीवास्तव पूर्व सीएसके किसी पत्र की नहीं है मुझे जानकारी  | News 4 India

मलय श्रीवास्तव पूर्व सीएसके किसी पत्र की नहीं है मुझे जानकारी 

भोपाल न्‍यूज 4 इंडिया। अपराधों पर लगाम कसने के लिए प्रस्‍तावित कमिश्‍नर प्रणाली और पब्लिक सेफ्टीबिल के प्रावधानों पर उठे सवालों के बाद सरकारने इसे फिलहाल ठंडे बस्‍ते में डाल दिया है। पूर्व मुख्‍य सचिव निर्मला बुच ने दोनों बिलों के प्रस्‍तावों की खामियों को लेकर मुख्‍यमंत्री और मुख्‍य सचिव को कड़ी चिट्ठी लिखी है। ये सवाल उठाया है कि प्रदेश में ऐसे हालात तो नहीं है, जिसमें पुलिस को घर और संस्‍थानों में तलाशी के मनमाने अधिकार मिल जाएं। इसलिए किसी भी हाल में इसे कानून का रूप न दिया जाए। उन्‍होंने यह भी लिखा कि दूसरे राज्‍यों के आधार पर कमिश्‍नर प्रणाली और पब्लि सेफ्टी बिल लागू करना उचित नहीं है।

मार्च 2018में सरकार ने मप्र जनसुरक्षा विनिमय विधेयक(एमपी पब्लिक सेफ्टी रेगुलेशन बिल) को जल्‍द लाने का दावा किया था विभाग ने इसका मसौदा तैयार करने के बाद विधि विभाग को भी भेज दिया था, लेकिन इसके प्रावधानों पर प्रदेशभर से आई आपत्ति के बाद इसे रोक दिया गया है। शहर के रिटायर्ड आईएएस अफसर, प्रोफेसर, एडवोकेट और सोशल एक्टिविटी ने बिल के प्रावधानों पर एतराज जताया था।

शासन ने एक्‍ट के बारे में जनता से कोई राय नहीं ली है प्रावधानोंमें पुलिस का हस्‍तक्षेप सभी संस्‍थानों तक होने का जिक्र है प्रावधान हे कि गर्ल्‍स हॉस्‍टल तक पुलिस जा सकेगी। यह कानून निजता के अधिकार के प्रतिकूल होगा। घरों और संस्‍थाओं तक पुलिस को घुसने जैसी स्थिति अभी प्रदेश में नहीं बनी है।

पुलिस कमिश्‍नरी का मुद्दा चुनाव के पहलेही क्‍यों आता है। वर्ष 1996, 2002, 2008 और 2013 में चुनाव के पहले उठाया गया। कोई नई प्रणाली शुरू करने के बहुत से पहलू होते हैं और उन सभी पर विचार कर जनता के सामने रखा जाना चाहिए। ये सिस्‍टम केवल बड़े शहर में एक सीनियर अफसर को ज्‍यादा अधिकार देने जैसा है।

प्रमुख सचिव गृह विभाग, मलय श्रीवास्‍तव का कहना है कि पब्लिक सेफ्टी बिल और पुलिस कमिश्‍नर प्रणाली को लेकर विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्‍ताव नहीं आ रहा है। पूर्व सीएस के पत्र की मुझे कोई जानकारी नहीं है।

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