भारत का पहला हाइपरलूप बनेगा आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा से अमरावती के बीच

भारत का पहला हाइपरलूप बनेगा आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा से अमरावती के बीच

न्‍यूज 4 इंडिया। आंध्र प्रदेश सरकार ने भारत में पहले हाइपरलूप प्रणाली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाने के लिए अमेरिका स्थित हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी (HTT) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। समझौता ज्ञापन के तहत, छह महीने की संभाव्यता अध्ययन अक्टूबर से आयोजित किया जाएगा। इस परियोजना से आंध्र प्रदेश में अमरावती और विजयवाड़ा शहर को जोड़ने का उद्देश्य है, जिससे सिर्फ पांच मिनट में 35 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। यह तकनीक बुलेट ट्रेन से भी तेज चलने वाली है। इसकी अनुमानित रफ्तार 1200 किमी प्रति घंटा तक होती है।
एचटीटी को आंध्र प्रदेश आर्थिक विकास बोर्ड द्वारा हाइपरलोप को लागू करने के लिए सभी नियामक आवश्यकताओं के साथ सहायता मिलेगी। अध्यक्ष और सह-संस्थापक, एचटीटी, बीबोप ग्रिस्टा ने कहा कि हम भारत के लिए HTT हाइपरलूप लाने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के साथ समझौता करके बेहद खुश हैं।  जानकारी के मुताबिक हाइपरलूप का काम अक्टूबर से शुरू हो जाएगा। प्रोजेक्ट को 6 महीने तक फिजिबिलिटी टेस्‍ट के अंतर्गत रखा जाएगा। प्रोजेक्‍ट के पहले चरण में एचटीटी छह महीने का फिजिबिलिटी टेस्‍ट करेगी। इसके बाद हाइपरलूप ट्यूब बनाने का काम शुरू होगा।

क्या है हाइपरलूप तकनीक:

  • हाइपरलूप टेस्ला के संस्थापक एलन मस्क के दिमाग की उपज है, जिन्होंने साल 2013 में एक वाइटपेपर के रूप में हाइपरलूप की बेसिक डिजाइन से दुनिया को रू-ब-रू किया था।
  • हाइपरलूप दुनियाभर के विभिन्न देशों में अलग-अलग ट्रायल स्टेज से गुजर रही है। हाइपरलूप चुंबकीय शक्ति पर आधारित एक नई तकनीक है।
  • हाइपरलूप तकनीक के तहत खंभों के ऊपर (एलिवेटेड) ट्यूब बिछाई जाती है। इसके भीतर बुलेट जैसी शक्ल की लंबी सिंगल बोगी हवा में तैरते हुए चलती है।
  • इसमें बिजली का खर्च बहुत कम है और प्रदूषण बिल्कुल नहीं है।
  • हाइपरलूप को भविष्‍य का सार्वजनिक यातायात का प्रमुख जरिया माना जा रहा है।
  • इसमें एक ट्यूब जैसी संरचना बनाई जाती है। इसके अंदर पॉड या कंटेनर के जरिए यात्रा होती है।

 

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