17 वर्ष की उम्र में की वकालत पास, 95 वर्ष की उम्र में सन्यास

नई दिल्ली न्यूज 4 इंडिया। देश के मशहूर वकील राम जेठमलानी अब वकालत नहीं करेंगे। शनिवार को बार काउंसिल के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 14 सितंबर को 95 साल का हो रहा हूं। उस दिन वकालत से सन्यास ले लूंगा। जेठमलानी के नाम देश में सबसे कम उम्र और सबसे अधिक उम्र के वकील होने का रिकॉर्ड है। उन्होंने महज 19 साल की उम्र में वकालत शुरू की और 76 साल से इस पेशे में हैं। रिटायरमेंट की घोषणा के बाद राम जेठमलानी से किसी भी मीडिया की पहली बातचीत

ऽ     कहा जाता है जेठमलानी के लिए जज को भी तैयारी करके आना पड़ता है। आपके लिए सबसे टफ कौन रहे।

कोई जज नहीं मिला जिसके सामने मैं नर्वस हुआ। मैंने हर कोई केश में जी-जान से मेहनत की है। हां ऐसा बहुत बार हुआ है जब मेरे तर्कों की वजह से जज जरूर नर्वस हुए। पर वे भी सम्मान करते हैं।

ऽ     आपने आसाराम, अफजल गुरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के हत्यारे जेसे लोगों की पैरवी की। क्यों

वकील का काम है केश लड़ना। अच्छे-बुरे के आधार पर केश चुनना वकालत के सिद्धांतों के खिलाफ है। मैं केस लेते समय देखता हूं कि मेरे पास आने वाले व्यक्ति के खिलाफ कितने फर्जी गवाह तैयार किए गए हैं। छवि मायने नहीं रखती।

ऽ     खिलाड़ियों के सन्यास होते रहे हैं, किसी वकील का शायद पहली बार होगा। क्या पब्लिसिटी के लिए।

जिस मुकाम पर हूं, वहां और क्या पब्लिसिटी चाहिए। एक हफ्ते पहले भी जस्टिस कुरियन जोसेफ के सामने कहा था कि ये मेरा आखिरी केस है। शनिवार को वही बात दोहराई।

ऽ     राम जेठमलानी किसके जैसा बनना चाहते थे।

76 साल में बहुत से अच्दे और सम्मान देने योग्य लोग मिले। पर उनमें से कोई उसक कसौटी पर खरा न उतरा, जिसे मैं अपना आदर्श मान सकता।

ऽ     कौन सा केस आपके लिए सबसे ज्यादा मुश्किल रहा।

पहला केस अपने अधिकारों के लिए लड़ा था। मैं रिफ्यूजी था, जो पाक से आया था, तब महाराष्ट्र की मोरारजी सरकार ने बाम्बे रिफ्यूजी एक्ट पास किया। रिफ्यूजियों को अपराधियों के तौर पर ट्रीट किए जाने की बात कही गई थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *