स्वामी विवेकानंद का मात्र भाषण नहीं था बल्कि तपस्वी की तपस्या का सार था

नई दिल्ली न्यूज 4 इंडिया। अमरीका के शिकागो में स्वामी विवेकानंद के संबोधन की 125 वहीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 सितंबर 1893 को शिकागो में स्वामी विवेकानंद का संबोधन मात्र भाषण नहीं था, बल्कि यह एक तपस्वी की तपस्या का सार था। वरना उस समय तो दुनिया में हमें सांप, सपैरों और जादू टोना करने वालों के रूप में देखा जाता था। सफाई के मुद्दे पर उन्होंने देश भर के विश्वविधालयों और कॉलेजों के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पान की पीक थूकने वालों को बंदे मातरम कहने का हक नहीं है। गांधी जी नेहरू, विवेकानंद, भगत सिंह के सपनों का हिंदुस्तान बनाने की जिम्मेदारी हमारी है। उन्होंने कहा, दुनिया को 2001 से पहले ये पता नहीं था कि 9/11 का महत्व क्या है 125 साल पहले भी 9/11 हुआ था, जिसमें स्वामीजी ने दुनिया को सार्थक रास्ता दिखाया था। पीएम ने कहा कि कुछ लोग  कॉलेजों में डे मनाते हैं, आज रोज डे है। कुछ लोग इसका विरोध करते हैं।

मैग्नाकार्टा हैं स्वामीजी के भाषणः सोनिया

कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि मौजूदा समय के नफरत एवं अहिष्णुता के माहौल में स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण आगे बढ़ने का ‘मैग्नाकार्टा’ है। सोनिया ने विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण की 125 वी वर्षगांठ के अवसर पर उनको श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि स्वामी जी ने सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकार्यता की बात की थी।

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