होती हैं मौतें, इसलिए प्रशासन फोड़ रहा ‘मौत के घड़े’

अंबिकापुर  न्‍यूज 4 इंडिया।   मौसमी बीमारियों के लिए अतिसंवेदनशील मैनपाट विकासखंड के ग्राम सुपलगा, पैगा, असगवां में हर वर्ष होने वाली मौतों को रोकने इस बार प्रशासन सख्त है। मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों की संवेदनशील ग्रामों में तैनाती के अलावा घर-घर छापेमारी कर हड़िया, खुखड़ी, पुटू, सड़ा महुआ आदि जब्त कर नष्ट कर रहे हैं।

बार-बार समझाइश के बावजूद माझी, मझवार समुदाय के सदस्यों द्वारा उक्त खाद्य सामग्रियों का सेवन करना नहीं छोड़ने से यह सख्ती बरती जा रही है। इन्हीं सड़े-गले खाद्य सामग्रियों के सेवन से उल्टी-दस्त से ग्रामीणों के पीड़ित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

मैनपाट के कई गांव बारिश के सीजन में मौसमी बीमारियों के लिए अतिसंवेदनशील हो जाते हैं। कई गांवों तक बरसात के दिनों में आसानी से पहुंच पाना भी संभव नहीं हो पाता। मैदानी स्वास्थ्य अमले की मौजूदगी और बार-बार समझाइश के बावजूद परंपरा के नाम पर दर्जनों परिवार आज भी ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, जो बीमारियों के संवाहक बनते हैं।

गर्म व ताजा भोजन की समझाइश की अनदेखी तथा जंगली पुटू, खुखड़ी, कीड़े लगे हड़िया, कई दिनों का पका कटहल सेवन से बिगड़ने वाले स्वास्थ्य लगाम लगाने की कोशिश शुरू हुई है। सीतापुर एसडीएम अतुल शेट्टे अभियान की मानिटरिंग कर रहे हैं। ग्रामीणों के घरों में छापेमारी से जहां भी अखाद्य जैसे सामग्रियां मिल रही हैं, उन्हें जब्त कर गांव वालों के सामने ही नष्ट किया जा रहा है।

ग्रामीणों को समझाइश दी जा रही है कि वे जागरूक हों। घर व आसपास का परिवेश साफ-सुथरा रखने के साथ ही खानपान में भी सावधानी बरतें। इसी कड़ी में एसडीएम अतुल शेट्टे के नेतृत्व में तहसीलदार आरएस वर्मा, मेडिकल आफिसर डा. मिथलेश सिंह, महिला बाल विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति में सुपलगा, असगवां, पैगा आदि गांवों में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने ग्रामीणों की बैठक लेकर खानपान में बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई।

शुद्घ पेयजल उपलब्धता को लेकर गांव वालों से जानकारी ली गई। हैंडपंप का साफ पानी पीने की समझाइश देने के साथ ही किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर स्वास्थ्य कर्मचारियों से संपर्क करने प्रेरित किया। बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि मितानिनों के पास दवाओं का पर्याप्त भंडारण किया गया है। गांव वाले मितानिनों से भी दवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

54 घरों में छापामारी

एसडीएम के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने सुपलगा, पैगा व असगवां में पुलिस बल को साथ लेकर कुल 54 घरों में छापेमारी की। मझवार बस्तियों में जाकर खानपान की व्यवस्था की भी जानकारी ली गई।

ग्राम सुपलगा में 21, पैगा में 25 व असगवां में आठ घरों में जांच के दौरान बड़ी मात्रा में कीड़े लगे हड़िया, खुखड़ी, महुआ पास, पका कटहल आदि मिला। इन सबकी जब्ती की गई। इन खाद्य सामग्रियों के सेवन से होने वाली बीमारियों के संबंध में गांव वालों को जागरूक कर नष्ट किया गया। ग्रामीणों को समझाइश दी गई कि ये खाद्य सामग्रियां जहरीली हो सकती हैं। इन खाद्य सामग्रियों के सेवन से बचना चाहिए।

हड़िया में कीड़ा, रानू गोटी भी मिला

मझवार बस्तियों में जांच के दौरान अधिकांश घरों में हड़िया शराब मिली। चावल को सड़ाकर इसका निर्माण कराया जाता है। जांच में हड़िया में कीड़े बिलबिला रहे थे। इन्हीं हड़िया का सेवन मझवार परिवार के कई सदस्यों द्वारा किया जाता था। इन हड़िया के अलावा महुआ शराब निर्माण के लिए रखे गए महुआ पास को भी नष्ट कराया गया व हांडियां फोड़ी गई।

बड़ी मात्रा में रानू गोटी भी बरामद हुई। रानू गोटी का उपयोग हड़िया निर्माण के लिए किया जाता है। प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर प्रभावित परिवारों में खलबली मची रही। लोग खुद घर में रखे इन सामानों को बाहर निकाल जमा कराते नजर आए।

पिछले साल भी हुई थी कई मौतें

मैनपाट के असगवां, सुपलगा, पैगा आदि गांवों में उल्टी-दस्त व दूसरी मौसमी बीमारियों से हर वर्ष मौतें होती हैं। गत वर्ष भी कई लोगों की मौत हो गई थी। मौतों का सिलसिला शुरू होने के बाद इसे रोक पाना भी आसान नहीं रह जाता।

गत वर्ष प्रशासन द्वारा पंचायत के माध्यम से ताजा व गर्म भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई थी, साथ ही मझवार परिवार के लोगों व घरों के आसपास के परिवेश को साफ-सुथरा कराया गया था।

बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को लगाकर मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए जनजागरूकता अभियान चलाए जाने के बाद स्थिति नियंत्रण में आ सकी थी। गत वर्षों के समान इस वर्ष भी हालात निर्मित न हो जाएं, इसकारण प्रशासन द्वारा पहले से ही ऐहतियातन यह कार्रवाई की जा रही है।

मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए पूरा प्रबंध कर लिया गया है। मैदानी स्वास्थ्य अमले के माध्यम से जांच व उपचार की सुविधा तो पहले से ही उपलब्ध है, लेकिन खानपान में असावधानी से ग्रामीण बीमार न हों, इसे ध्यान में रखते हुए ऐसे खाद्य सामग्रियों को नष्ट कराया जा रहा है, जिसके सेवन से बीमारियों का खतरा बना रहता है। गांव वालों को गर्म व ताजा भोजन सेवन करने की समझाइश दी जा रही है। – अतुल शेट्टे, एसडीएम, सीतापुर

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