[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: फांसी की सजा बरकरार पुनर्विचार याचिका खारिज  – News 4 India

फांसी की सजा बरकरार पुनर्विचार याचिका खारिज 

नई दिल्‍ली न्‍यूज 4 इंडिया। दुष्‍कर्मियों को उनके गुनाहों की सजा मिलेगी। 16 दिसंबर 2012 की रात को दिल्‍ली में चलती बस में निर्भया के साथ बर्बरता और सामूहिक दुष्‍कर्म करने वाले दरिंदों को फांसी की सजा होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई को तीन दोषियों मु‍केश सिंह(29), पवन गुप्‍ता(22) और विनय शर्मा(23) की रिव्‍यू पिटीशन खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोषियों की ओर से फांसी की सजा के उसके फैसले पर पुनर्विचार करने का कोई आधार नहीं दिया गया।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आर भानुमति और अशोक भूषण की बेंच ने कहा कि दिल्‍ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर इनकी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इन्‍हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया था। मामले में चौथे गुनहगार अक्षय ठाकुर ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर ही नहीं की थी। इन दोषियों ने दिसंबर 2017 को पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को तीनों की पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले 5 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों को फांसी की सजा के दिल्‍ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।

डेथ वारंट- अभियोजन पक्ष कोर्ट से करता है अपील

सुप्रीम कोर्ट के वकील सुमित वर्मा ने बताया कि अभियोजन पक्ष जिला अदालत से अभिमुक्‍तों के नाम का डेथ वारंट जारी करने की अपील करता है। जिला अदालत गुनहगारों की फांसी की सजा को अमल में लाने के लिए कम से कम 15 दिन बाद का समय देगा। इसके बाद तय समय पर फांसी दी जाती है।

निर्भया की मां ने कहा कि सुबह जब घर से निकल रही थी तो बेटी की तस्‍वीर के सामने धूपबत्‍ती की और बोली कि आज एक और कानूनी लड़ाई का फैसलाआ रहा है। कोर्ट के इस फैसले से सुकून मिला है।

पुनर्विचार याचिका

पुनर्विचार याचिका में गुनहगारों ने कहा कि दोषियों की पृष्‍ठभूमि और सामाजिक व आर्थिक हालात को देखते हुए सजा कम की जाए। 115 देशों ने मौत की सजा खत्‍म कर दी है यह सिर्फ अपराधी को खत्‍म करती है, अपराध को नहीं। यह जीने के अधिकार को छीन लेती है। यह मामला दुर्लभतम से दुर्लभ अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

क्‍या है मामला

23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा से 16 दिसंबर 2012 की रात दिल्‍ली में चलती बस में सामूहिक दुष्‍कर्म किया गया था। बेहोश पीडि़ता को अपराधियों ने बस से सड़क किनारे फेंक दिया था। पीडि़ता की सिंगापुर के अस्‍पताल में इलाज के दौरान 29 दिसंबर को मृत्‍यु हो गई थी। इस घटना के विरोध में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे।

गुनहगारों के पास अब दो रास्‍ते

क्‍यूरेटिव पिटीशन- वकील सुमित पुष्‍करणा ने बताया कि दोषी अब सुप्रीम कोर्ट में क्‍यूरेटिव पिटीशन दायर कर सकते हैं। यह याचिका किसी वरिष्‍ठ वकील की सलाह के बाद ही दायर की जा सकती है। इस पर संभावना रहेगी कि कम से कम पांच जज सुनवाई करेंगे, क्‍योंकि मूल निर्णय तीन जजों की बेंच ने दिया है।

दया याचिका- क्‍यूरेटिव याचिका खारिज होने के बाद गुनहगारों के सामने राष्‍ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने का रास्‍ता होगा। दया याचिका राष्‍ट्रपति खारिज करते हैं तो अभियोजन पक्ष जिला अदालत से गुनहगारों का डेथ वारंट जारी करने की अपील करेगा।

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