[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: 18 दिन, मिशन हुआ पूरा, मिली कामयाबी – News 4 India

18 दिन, मिशन हुआ पूरा, मिली कामयाबी

थाईलैंड न्‍यूज 4 इंडिया। आखिर रेस्‍क्‍यू टीम को सफलता मिल ही गई। थाईलैंड की 10 किमी लंबी गुफा में फंसे बाकी चार बच्‍चों को और उनके कोच को भी सुरक्षित निकाल लिया गया। इसी के साथ दुनिया के सबसे जोखिम भरे बचाव अभियान का सुखद अंत हो गया। सबसे आखिर में टीम के साथ गुफा में रूके तीन डाइवर्स और डॉक्‍टर की टीम बाहर निकाली गई। वाइल्‍ड बोर्स क्‍लब की अंडर-16 टीम के 12 फुटबाल खिलाड़ी और कोच 23 जून को इस गुफा में गए थे। लेकिन गुफा के गेट में बाढ़ का पानी घुस गया। इससे ये लोग फंस गए। बाढ़ के पानी और दलदल से बचते-बचातेये टीम गुफा में चार किमी के अंदर एक चेंबर में ऊंचे टीले पर पहुंच गई थी, जिससे इनकी जान बच सकी। गुफाममेंइनकी साइकिल, सामान और पैरों के निशान मिलने के बाद तय हो गया था कि ये बच्‍चे गुफा में ही हैं। इस दलदल और पानी से भरी इस गुफा में फिर दुनिया का सबसे जोखिम भरा इंटरनेशनल रेस्‍क्‍यू मिशन शुरू हुआ। आखिर 2 जुलाई को ब्रिटिश गोताखोर इन तक पहुंचे।

इस अभियान में ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, चीन, ऑस्‍ट्रेलिया के सबसे काबिल डाइवर्स ने हिस्‍सा लिया। थाईलैंड के पीएम प्रयुत ने कहा कि इस घटना के बाद गुफा के बारे में भले ही पूरी दुनिया ने जान लिया हो पर इसे बंद कर दिया जाएगा। इसमें रोशनी और संकेतक लगाए जाएंगे, ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो। सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही इसे खोला जाएगा।

थाईलैंड के पीएम प्रयुत ने बताया कि बच्‍चों को बाहर निकाले जाने से पहले चिंता निवारक दवा दी गई थी ताकि वे इस प्रक्रिया से डरे नहीं। ये दवा सैनिक भी लेते हैं। ध्‍यान केंद्रित होने से शार्प शूटिंग बेहतर होती है। हालांकि उन्‍होंने कहा बच्‍चों को बेहोश कर बाहर लाने वाली खबर पूरी तरह से गलत है।

सभी बच्‍चे शारीरिक और मानसिक तौर पर फिट हैं

9 जुलाई को गुफा से निकले सभी आठ बच्‍चों की शारीरिक और मानसिक तौर पर फिट हैं। इनकी एक्‍सरे और ब्‍लड रिपोर्ट ठीक है। हालांकि दो बच्‍चों के फेफड़ों में संक्रमण की आशंका है। और उनका इलाज चल रहा है। हालांकि सभी बच्‍चे खतरे से बाहर हैं ये कम से कम सात दिन तक अस्‍पताल में रखे जाएंगे।

अंधेरे रहने की वजह से बच्‍चे अभी सनग्‍लास पहले रहेंगे

बच्‍चे दो हफ्ते से ज्‍यादा वक्‍त तक गुफा के घुप अंधेरे में रहे हैं इसलिए इन्‍हें सनग्‍लास पहनाकर रखा गया है। इस अभियान को थाईलैंड के 40 और 50 विदेशी गोताखोरों ने अंजाम दिया। इनके लिए यह चुनौती भरा अभियान था। इनके चेहरे मॉस्‍क से ढंके हुए थे।

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