[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: 14 साल में एक को भी नहीं मिला इस योजना का लाभ  – News 4 India

14 साल में एक को भी नहीं मिला इस योजना का लाभ 

 

मंडीदीप न्‍यूज 4 इंडिया।  राज्‍य सरकार द्वारा जनसंख्‍या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन सहित अन्‍य संचालित सभी योजनाएं नाकाम साबित हो रही हैं। नव दंपत्तियों को पुरस्‍कार देने वाली प्रेरणा योजना केभी मंशानुरूप परिणाम नहीं मिल रहे हैं। पुरस्‍कार में पैसा मिलने के बावजूद भी यह प्रेरणा योजना नवदंपत्तियोंको प्रेरित करने में नाकाम हो रही है। पिछले 14 सालों में अधिकारी एक भी परिवार को प्रावधानों का पालन करा लाभ नहीं दिला पाए।

सरकार द्वारा वर्ष 2004 में परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरणा योजना प्रारंभ की गई थी। इसके तहत शादी से परिवार नियोजन ऑपरेशन कराने तक दंपत्तियों को तीन बार पुस्‍कार देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में योजना ने दम तोड़ दिया। इसकी हकीकत का पता इससे लगाया जा सकता है कि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा योजनांतर्गत बीते वर्ष केवल 48 केस ही जिला कार्यालय को मंजूरी के लिए भेजेगए थे, जबकि इस वर्ष अब तक एक भी आवेदन नहीं भेजा गया है। यह स्थिति तब है जब ब्‍लॉक में सालभर में करीब 2 हजार से ज्‍यादा शादियां हुईं। इसके बाद भी जिम्‍मेदार योजना के शुरूआत से अब तक पिछले 14 सालों से एक भी हितग्राही को लाभ नहीं दिला सके।

प्रोत्‍साहन राशि में बढ़ोत्‍तरी की फिर भी नाकाम

इस योजना के तहत बीएमओ कार्यालय द्वारा पिछले साल 48 परिवारों के नामों का प्रस्‍ताव जिला स्‍वास्‍थ्‍य कार्यालय को चयन के लिए भेजा गया था, लेकिन नियमों पर खरे न उतरने एवं जरूरी दस्‍तावेज उपलब्‍ध न करा पानेके कारण सभी को अमान्‍य कर दिया गया। वहीं प्रचार प्रसार के अभाव में लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। इस कारण वे योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। योजना सिर्फ कागजों में ही दौड़ रही है। वहीं विभाग ने परिवार नियोजन को बढ़ावा देनेके लिए प्रोत्‍साहन राशि में एक हजार रूपए तक की बढ़ोत्‍तरी की है। पुरूषों द्वारा परिवार नियोजन अपनाने पर 3 हजार रूपए मिलते हैं। जबकि महिलाओं द्वारा सामान्‍य नसबंदी कराने पर दो हजार एवं प्रसव उपरांत सात दिन में ऑपरेशन करानेपर 3 हजार रूपए दिए जाते हैं। इतना ही नहीं प्रेरक एवं डॉक्‍टर को भी 400 रूपए दिए जाते हैं। बावजूद इसके सार्थक परिणाम नहीं मिल रहे हैं। ब्‍लॉक में 101 दिनों में सिर्फ 10 महिलाओं की ही नसबंदी की जा सकी। जबकि लक्ष्‍य 2 हजार महिला-पुरूष नसबंदी का है। पिछले वर्ष भी 1800 के लक्ष्‍य की तुलना में 1450 नसबंदी ही की जा सकी थीं।

परिवार नियोजन अपनाने में अनपढ़ों के साथ उच्‍च‍ शिक्षित भी पीछे

विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में ब्‍लॉक की आबादी 2 लाख 60 हजार है। बीते दस सालों में दो प्रतिशत के मान से इसमें 40 हजार की वृद्धि दर्ज की गई है। यदि जिम्‍मेदारों ने नसबंदी के लक्ष्‍य को पूरा करने के साथ उक्‍त योजना का सही क्रियान्‍वयन किया होता तो इस बढ़ी आबादी में कम से कम दस फीसदी की कमी आती। सीएचसी के डॉ. अरविंद चौहान बताते हैं कि देखने में आया है कि परिवार नियोजन अपनाने में अनपढ़ों के साथ उच्‍च शिक्षित भी पीछे हैं। इस मामले में सभी को जागरूक होने की जरूरत है।

ऐसे मिलते हैं तीनों पुरस्‍कार

शादी के समय युवती 19 व युवक 21 साल का हो तो पांच हजार रूपए मिलते हैं।

शादी के दो साल बाद पहला बच्‍चा लड़के पर 5 हजार और लड़की होने पर 7 हजार रूपए।

उसके तीन वर्ष बाद दूसरा बच्‍चा होने पर दंपत्ति को 5 हजार रूपए का पुरूस्‍कार, बशर्ते दोनों में से कोई एक परिवार नियोजन कराए।

दस्‍तावेज जरूरी

पुरस्‍कार पाने के लिए दंपत्‍ती को 6 प्रकार के दस्‍तावेज संलग्‍न करने होते हैं। इनमें महिला का जन्‍म प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, इसके अगले तीन साल बाद दूसरे बच्‍चे का जन्‍म प्रमाण पत्र, नसबंदी ऑपरेशन की फोटो कॉपी आदि दस्‍तावेज आवश्‍यक हैं।

बीएमओ, औबेदुल्‍लागंज, डॉ. केपी यादव का कहना है कि योजना के तहत बीत साल 48 परिवारों के नाम का प्रस्‍ताव दिया गया था, जो नियमों के अनुरूप न पाए जाने के कारण अमान्‍य कर दिए गए। योजना के प्रचार-प्रसार व आमजन को आंगनबाड़ी एवं स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ताओं के माध्‍यम से जागरूक किया जा रहा है।

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