रैगिंग की दहशत ,हल निकालिए नहीं तो छोड़नी पड़ेगी पढ़ाई 

भोपाल न्‍यूज 4 इंडिया। गांधी मेडिकल कॉलेज के पीजी स्‍टूडेंट्स को लेकर दूसरी यूजीसी एंटी रैगिंग हेल्‍पलाइन पर दूसरी शिकायत 11 जुलाई को पहुंची है। इस बार पीजी फर्स्‍ट ईयर स्‍टूडेंट्स ने अपनी सीनियर्स द्वारा प्रताडि़त किए जाने के आरोप लगाए हैं। इनका कहना है कि उन्‍हें जानबूझकर परेशान किया गया है। उन्‍हें चार से पांच दिन तक नहाने भी नहीं देते। वे काम भी पूरा कर दें और अपने रूम में चले जाएं तो बहुत बुरी तरह से 20-20 मिनिट प्रताडि़त करते हैं। और गंदीभाषा में बात करते हैं। अब तो यह स्थिति आ गई है कि पीजी की पढ़ाई ही छोड़ दें। यदि जल्‍द से जल्‍द मदद नहींमिली तो पीजी की पढ़ाई बीच में छोड़ सकते हैं। यह जूनियर्स प्रमुख रूप से आर्थोपेडिक, गायनोलॉजी सर्जरी डिपार्टमेंट है। इन्‍होंने शिकायत में बताया कि सीनियर उन्‍हें खाने का समय भी नहीं देते। पीजी फर्स्‍ट ईयर के स्‍टूडेंट के आरोप हैं कि उनसे जबरन काम कराया जाता है इसमें बहुत कुछ उनके काम का भी नहीं होता। 24 घंटे काम कराते हैं। सोने भी नहीं देते। उनका व्‍यवहार अमानवीय है। इसलिए उन्‍होंने इससे राहत दिलाने की मांग की है। ताकि वह अपनी पढ़ाई प फोकस कर सकें। यह देखने में सामने आ रहा है कि ट्रेनिंग के नाम पर रैगिंग जैसी घटनाओं से पीजी स्‍टूडेंट्स भी परेशान हैं। इससे पहले गांधी पीजी कॉलेज के सीनियर्स स्‍टूडेंट्स के खिलाफ 17 जून को भी एंटी रैगिंग हेल्‍पलाइन में शिकायत पहुंची थी। इस मामले में आपसी समझौते की बात सामने आयी थी नई शिकायत को लेकर डीन डॉ. एमसी सोनगरा का कहना है कि इस मामले में 12 जुलाई को जांच की जाएगी।

शिकायत करनेवाले जूनियर स्‍टूडेंट का कहना है कि 24 घंटे में वे एक बार भी अपने कमरेमें 15 मिनट से अधिक समय के लिए नहीं जा सकते। यदि 15 मिनट से अधिक समय हो जाता है तो वे कहीं पर दंड देते हैं। उसने कहा कि यह किसी एक जूनियर की समस्‍या नहीं है इससे सभी जूनियर प्रताडि़त हो रहे हैं।

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