जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक संपन्न

छिन्दवाडा न्‍यूज 4 इंडिया। कलेक्टर श्री जे.के.जैन की अध्यक्षता में  कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाईन फ्लू आदि बीमारियों की रोकथाम के संबंध में जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक संपन्न हुई । बैठक में नगर निगम महापौर श्रीमती कांता सदारंग और अध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र मिगलानी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री रोहित सिंह, अतिरिक्त कलेक्टर श्री आलोक श्रीवास्तव, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शरद बंसोड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभारी चिकित्सक, सभी बी.एम.ओ. और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे ।

बैठक में कलेक्टर श्री जैन ने निर्देश दिये कि चिकित्सक मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाईन फ्लू    आदि बीमारियों के मरीजों के आने पर उनका तत्परता से उपचार करें । अक्सर यह देखा जाता है कि सर्दी खांसी, दर्द व अन्य बीमारियों पर लोग अपने मन से ही दवाईयां लेते है, जबकि उन्हे चिकित्सक के परामर्श से दवाईयां लेना चाहिये । बैठक में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाईन फ्लू आदि बीमारियों की रोकथाम पर गहन चर्चा करते हुये कहा कि लोगों में इस विषय को लेकर जागरूकता लाये और मच्छरजनित स्थान को नष्ट करने का प्रयास करें ताकि मच्छर पैदा न हो सके । इसके साथ ही छत एवं घर के आस-पास अनुपयोगी सामग्री में पानी जमा न होने दें । सप्ताह में एक बार अपने टीन, डब्बा, बाल्टी आदि का पानी खाली कर दें । दोबारा उपयोग करने से पहले उन्हे अच्छी तरह सुखायें । सप्ताह में एक बार अपने कूलर का पानी खाली कर दें फिर सुखाकर पानी भरें । पानी के बर्तन टंकियों आदि को ढक कर रखे । हैन्डपम्प के आसपास पानी एकत्र न होने दें । सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें । घर के आस पास के गड्डो को मिट्टी से भर दें ।

बैठक में स्वाईन फ्लू के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुये बताया गया कि स्वाईनफ्लू (एच1एन1) वायरस संक्रमणकारी बीमारी है । सामान्यत: इसका संक्रमण संक्रमित व्यक्ति की छींक या खाँसी के संपर्क में आने के कारण होता है तथा स्वाईनफ्लू का संक्रमण जुलाई से फरवरी माह मे ज्यादा सक्रिय होता है। इसका संक्रमण नाक, मुंह एवं गले से आरंभ होकर फेंफड़ो तक पहुंचकर जानलेवा हो सकता है। इसलिये गले स्तर पर अर्थात् साँस लेने में तकलीफ होने पर मरीज बिना विलंब के तत्काल निकटतम चिकित्सालय मे जाकर चिकित्सीय सलाह लेकर उपचार करा सकते है । स्वाईन फ्लू से बचाव ही उसका उपचार है, इसलिये ऐहतियात बरतने की आवश्यकता है । सर्दी, जुकाम, खाँसी, गले मे खरास, सिर दर्द, बुखार के साथ साँस लेने मे तकलीफ होने पर मरीज तत्काल चिकित्सकीय परामर्श ले और परामर्श का पालन करे । इसमें 24 घंटे के भीतर उपचार आरंभ करना आवश्यक है । मरीज उपचार लेकर स्वस्थ व सुरक्षित रहे । याद रखे कि इसमें विलंब घातक हो सकता है । सभी शासकीय चिकित्सालयों मे स्वाईन फ्लू की दवाईयां नि:शुल्क उपलब्ध है । खाँसते एवं छींकते समय मुंह पर रूमाल रखे, संक्रमण होने पर एवं संक्रमण से बचाव हेतु भीड़-भाड़ से दूर रहे । किसी वस्तु, व्यक्ति एवं स्वयं के चेहरे को छूने से पहले एवं बाद मे साबुन से हाथ धोयें । संक्रमित व्यक्ति से लगभग एक मीटर की दूरी बनाये रखे ।

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