विधायकों की संपत्ति में तेजी से बढ़ोतरी

नई दिल्ली न्यूज 4 इंडिया। कई विधायकों और सांसदों की संपत्ति 500 गुना तक बढ़ जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए कई सवाल उठाए हैं। जस्टिस जे चेलमेश्वर ने कहा कि विधायक और सांसदों का काम हर समय लोगों की समस्याएं सुनने और उनहें सुलझाने का होता है। ऐसे में उनकी संपत्ति में इतनी तेजी से बढ़ोतरी किसी बिजनेस की वजह से हुई है तो उस पर भी सवाल उठता है। एक व्यक्ति विधायक या सांसद हेते हुए बिजनेस कैसे कर सकता है। जनता को पता होना चाहिए कि नेताओं की आय क्या है। जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस अब्दुल नजीर की बेंच एनजीओ लोक प्रहरी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसमें चुनाव नामांकन के समय उम्मीदवार को आय का स्त्रोत बताना जरूरी करने की मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

चुनावी हलफनामे में संपत्तियों के बारे में दी गई जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न से अलग

सीबीडीटी ने दो सीलबंद लिफाफे सोमवार को कोर्ट में दायर किए थे। इनमें एक लिफाफे में दी गई रिपोर्ट में बताया गया था कि सात लोकसभा सांसदों और 98 विधायकों द्वारा चुनावी हलफनामें में संपत्तियों के बारे में दी गई जानकारी से अलग है। वहीं दूसरे सीजबंद लिफाफे में उक्त सभी के नाम मंगलवार को दोनों लिफाफों को खोला गया। जब जस्टिस चेलमेश्वर सांसदों, विधायकों के नाम वाला दूसरा लिफाफा खोलने लगे तो अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अनुरोध किया कि इस लिफाफे के नामों को सार्वजनिक न किया जाए। इन सभी के खिलाफ अभी जांच चल रही है। इसे बेंच ने मान लिया। 26 लोकसभा सांसद और 315 विधायकों और दो राज्यसभा सांसदों की वेरिफिकेशन रिपोर्ट मिल चुकी है। जिसकी जांच की जा रही है।

केंद्र से कहा, आपने क्यों कुछ नहीं किया

बेंच ने मामले में केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया है। कोर्ट ने कहा कि यह जानकारी होते हुए भी आपने इस मामले में कुछ भी नहीं किया। आपको ऐसे मामलों को लेकर गठित एनएन वोहरा कमेटी की सिफारिशों को लागू करना चाहिए था। इस कमेटी की रिपोर्ट को लेकर कुछ भी नहीं किया। जस्टिस  चेलमेश्वर ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस पर विचार हो कि भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कैसी जांच और कार्रवाई की जाए। हमें यह भी विचार करना होगा कि ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रेक कोर्ट में हो। अब तय होगा कि नामांकन के समय प्रत्याशी का आय के स्त्रोत का खुलासा करना जरूरी है या नहीं।

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