स्लेटर को देनी होगी 25 प्रतिशत कमाई बंदर नारूटो को

सैन फ्रांसिस्को न्यूज 4 इंडिया। कैमरे में दांत दिखाते ओर आंख चमकाने वाली मंकी सेल्फी का केस अब खत्म हो गया है। नारूटो और फोटोग्राफर डेविड जे के बीच समझौता हो गया है। यह वही मंकी सेल्फी केस है, जिसे लेकर फोटोग्राफर डेविड स्लेटर को कॉपीराइट कानून के तहत कोर्ट तक ले जाया गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि नारूटो ने उनके कैमरे से अपनी तस्वीर खींच ली थी। बाद में स्लेटर ने इस तस्वीर को कई जगह अपने नाम से इस्तेमाल किया था। जिसका पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पीपल फॉर द एथनिकल ट्रीटमेंट ऑफ़ ऐनिमलस(पेटा) ने विरोध किया था। दोनो पक्षों के वकीलों ने अब इस मंकी सेल्फी के कॉपीराइट को लेकर सैन फ्रांसिस्कों की 9वीं यूएस सर्किट कोर्ट में समझौता कर लिया। स्लेटर और पेटा के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि फोटोग्राफर स्लेटर ने वादा किया है कि वह भविष्य में इस फोटो से होने वाली कमाई का 25 प्रतिशत नारूटो और इंडोनेशिया में पाए जाने वाले इस दुर्लभ मकॉक प्रजाति के बंदर की सुरक्षा के लिए दान करेंगे। हालांकि स्लेटर के वकील एन्डू जे ने यह नहीं बताया कि अब तक इस फोटो से कितनी कमाई हुई है। पेटा ने 2015 में स्लेटर पर केस दिया था। इसमें बताया था कि स्लेटर ने सेल्फी लेने वाले मकॉक प्रजाति के नारूटो बंदर की जगह अपने नाम पर फोटो से कमाई की है। पेटा ने मांग की थी कि यह तस्वीर बंदर ने खुद ली है, इसलिए इससे होने वाली कमाई भी नारूटो को मिलनी चाहिए। जिस पर कोर्ट ने स्लेटर के पक्ष में कहा था कि अभी ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसमें यह बताया गया हो कि जानवरों को कॉपीराइट का अधिकार है।

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