[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: देश की पहली डब्ल्यूडब्ल्यूई पहलवान कविता संस्कृति बढ़ाने पहनती हैं ऐसे कपड़े | News 4 India

देश की पहली डब्ल्यूडब्ल्यूई पहलवान कविता संस्कृति बढ़ाने पहनती हैं ऐसे कपड़े

जींद न्यूज 4 इंडिया। विदेशी महिला पहलवानों को उठा-उठाकर पटकने वाली हरियाणा की कविता दलाल डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में उतरी देश की पहली महिला पहलवान हैं वेटलिफ्टिंग की इस पूर्व खिलाड़ी की खास बात है कि रिंग में वे सलवार-कमीज पहनकर उतरती हैं। कहती हैं कि वेटलिफ्टिंग में ड्रेस कोड होता है। इस वजह से सलवार कमीज पहनकर कभी उसमें हिस्सा नहीं ले पाई। अगर सलवार-कमीज पहनकर फाइट से कोई रोकता तो रेसलिंग छोड़ देती। यह हमारे देश की संस्कृति को विदेशों में बढ़़ावा देने का मेरा तरीका है। हालांकि कविता के रोजमर्रा के पहनावे में जींस, पेंट और शर्ट-टीशर्ट शामिल हैं। रेसलिंग में वे नाटकीय तरीके से आईं बात 13 जून 2016 की है। वे जालंधर में 4 साल के बेटे के साथ खली की अकेडमी में रेसलिंग शो देखने गई थीं। फाइट में दिल्ली की महिला रेसलर बुलबुल ने एक महिला को हराकर लड़कों व लड़कियों को चुनौती दे डाली कि कोई जो उससे मुकाबला कर सके। इस पर कविता का खून खौला तो वे सलवार कमीज में ही  ऑडियंस में से उठकर रिंग में पहुंच गईं। बुलबुल की चुनौती को स्वीकारा और उसे हरा दिया। इसके दो दिन बाद ही जब वे  दर्शकों में बैठी थीं तो पीछे से बुलबुल ने उन पर हमला कर दिया। इसमें उन्हें चोट आई। इसी दिन उन्होंने मन बना लिया कि अब वेटलिफ्टिंग छोड़कर रेगुलर प्रैक्टिस कर डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर बनेंगी। जालंधर में ही खूब प्रैक्टिस की और एक शो में अमेरिका की रेसल नटरिया, जिमी जेम व एटीना को शिकस्त दे डाली। तीन माह बाद ही अक्टूबर 2016 में हरियाणा के पानीपत में ओपन इंटरनेशनल रेसलिंग चैम्पियनशिप में अमेरिका की दो और कनाडा की एक रेसलर को चित कर दिया।

शुद्ध शाकाहारी हैं, सुबह की शुरूआत योग से

कविता बताती है कि उन्होंने कभी भी मीट नहीं खाया है। हमेशा ही शाकाहार फेवरेट रहा। देशी घी से बना हलवा, चूरमा, खीर, दूध लेती हैं। फाइट शुरू होने से एक-डेढ़ घंटे पहले उबले आलू, चना, चावल लेती हैं। कभी-कभी सप्लीमेंट लेती हैं। सुबह नास्ते में दूध के साथ दलिया खाती हैं। रिंग में प्रैक्टिस से पहले फ्रूट, ड्राईफ्रूट या प्रोटीन लेती हैं। लंच में दाल, सब्जी, चावल रोटी, सलाद होता है। शाम को जिम जाने से पहले दुध, केले आदि लेकर एक-डेढ़ घंटे खूब पसीना बहाती हैं। शाम को भोजन में हलवा, खीर, चूरमा और रोटी-सब्जी खाती हैं। इसके बाद ठंडा दूध पीती हैं। दिन में 3 लीटर दूध पीती हैं महीने भर में 6 किलों घी लगता है और रोज करीब 50 ग्राम काजू बादाम खाती हैं। उनकी डाइट का एक किस्सा 2008 का है। वे लखनऊ में वेटलिफ्टिंग ट्रेनिंग कैम्प में थीं। साथियों से शर्त लग गई कि कौन ज्यादा खाता है। वे 32 रोटियां खा गईं। जबकि साथी तो 16-17 के आगे बढ़ नहीं सके।

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