[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: वाह क्या बात है एक पंथ दो काज छात्र ओल्ड ऐज होम्स में किराएदार बनकर रहते हैं और किराया सिर्फ बुजुर्गों की देखभाल – News 4 India

वाह क्या बात है एक पंथ दो काज छात्र ओल्ड ऐज होम्स में किराएदार बनकर रहते हैं और किराया सिर्फ बुजुर्गों की देखभाल

 

नीदरलैंड न्‍यूज 4 इंडिया। नीदरलैंड में ओल्‍ड एज होम्‍स में बुजुर्ग और युवा छात्र एक साथ रहते हैं। युवा बुजुर्गों का ध्‍यान रखते हैं। उन्‍हें ईमेल करना, सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल करना और वीडियो चैट जैसी नई-नई टेक्‍नोलॉजी सिखाते हैं। और बदले में इन बुजुर्ग दोस्‍तों से जिंदगी के कायदे सीखते हैं।

दोनों के मिलने की कहानी भी रोचक है। ओल्‍ड एज होम्‍स में बुजुर्गों के जीवन को बेहतर बनाने का मकसद से ‘द केयर होम्‍स रीडिंग’ प्रोग्राम शुरू किया गया। इसके तहत बाहर से आए छात्र ओल्‍ड एज होम में रह सकते हैं। और उनसे किराया भी नहीं लिया जाएगा। इसके बदले में उन्‍हें रोजाना एक घंटे बुजुर्गों की देखभाल करनी होगी। खाने की टेबल लगाने से लेकर उनका बिस्‍तर लगाने तक। इन छात्रों को अपने बुजुर्ग साथियों को नई स्किल जैसे ईमेल करना, सोशल मीडियाका इस्‍तेमाल करना, स्‍काइप और यहां तक ग्रैफिटी आर्ट भी सिखानी पड़ती है।

ऐसे ही आइसर नदी के किनारे बसे वेंडरा शहर में बने एक ओल्‍ड एज होम में 19 साल की यूलिका 160 सीनियर सिटीजनके साथ रहती है। इनकी उम्र 65 साल से 104 साल तक की है। यूलिका कहती हैं कि किराया लेने की जगह कोई आपको मुफ्त में रहने के लिए अपना घर दे दे और उसके बदले में आपसे अपना थोड़ा  बहुत काम करा ले। यह बुरा आइडिया नहीं है। वेंडर शहर में करीब एक लाख लोग रहते हैं और उसमें एक चौथाई स्‍टूडेंट हैं। यहां सस्‍ता घर मिलना किसी सपने के पूरे होने जैसा ही है।

वो कहती हैं कि 160 बुजुर्ग साथियों के साथ हम छह युवा लोग रहते हैं। हर फ्लोर पर एक युवा साथी 25 से 30 बुजुर्गों के साथ रहता है। यहां आने से पहले मैंने सोचा कि यह अजीब आइडिया है। मेरे सारे पड़ोसी बूढ़े होंगे। पर धीरे-धेरी मैं इनके साथ घुल-मिल गई। यहां पर कोई आपसे अपना निजी काम नहीं कराता। वे तो बस आपसे बातें करना चाहते हैं। वे अपने पुराने दिनों की कहानी सुनाते हैं मेरी दोस्‍ती हो गई है। उनसे अलग नजरिया सीखने को मिलता है।

नीदरलैंड में यह प्रोजेक्‍ट हूमेनिट्स संस्‍था ने शुरू किया था। अब यह ट्रेंड ब्रिटेन, स्‍वीडन जैसे देशों में भी बढ़ रहा है। संस्‍था के अनुसार पढ़ाई पूरी होने के बाद भी बच्‍चे यहां रहना चाहते हैं। बच्‍चो-बुजुर्गों को जोड़ने के लिए यहां की यूनिवर्सिटी में ऐसे कई प्रोजेक्‍ट शुरू किए गए हैं। इसके तहत बच्‍चों को रोजाना शहर के बुजुर्गों से बातचीत करने के टास्‍क दिए जाते हैं।

रिसर्च में दावा

नीदरलैंड की एक्‍सीटर यूनिवर्सिटी ने इस प्रोग्राम पर रिसर्च की है। इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि बुजुर्ग लोगों के बीच युवाओं के रहने से उनका अकेलापन दूर हो रहा है सेहत भी सुधर रही है उनकी जीने की इच्‍छाशक्ति बढ़ी है।

दूसरी तरफ रिसर्च में युवाओं पर भी इसका सकारात्‍मक असर देखा गया है। युवाओं में बूढ़े लोगों से जुड़ने की भावना मजबूत होती है। बुजुर्गों का साथ इन्‍हें ज्‍यादा संवेदनशील बनाता है। ये छात्र घर के कर्मचारियों को राहत देते हैं और घर की गुणवत्‍ता में इजाफा करते हैं ये बच्‍चे बुजुर्गों को घुमाने भी ले जाते हैं।

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