[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: कहां बनेगी समाधि इस पर भी रात 11:00 बजे सुनवाई के लिए बैठे चीफ जस्टिस – News 4 India

कहां बनेगी समाधि इस पर भी रात 11:00 बजे सुनवाई के लिए बैठे चीफ जस्टिस

चेन्‍नई न्‍यूज 4 इंडिया। तमिलनाडु के पूर्व सीएम और डीएमके प्रमुख 94 वर्षीय एम करूणानिधि का 7 अगस्‍त को निधन हो गया। डीएमके पूर्व सीएम एमजीआर और जयललिता की तरह ही मरीना बीच पर उनका समाधिस्‍थल चाहती है। सरकार ने वहां जगह देने से इंकार कर दिया।

समर्थक रात को ही हाईकोर्ट पहुंच गए। रात 11 बजे कार्यवाहक चीफ जस्टिस के घर पर ही दो जजों की बेंच ने सुनवाई शुरू की। करीब दो घंटे तक सुनवाई चली। सरकार ने जवाब देने के लिए समय मांगा तो कोर्ट ने सुनवाई सुबह 8 बजे तक के लिए स्‍थगित कर दी। इससे पहले सरकार ने डीएमके को गांधी मंडपम में दो एकड़ जगह देने की पेशकश की थी, लेकिन वे मरीना बीच पर ही जगह लेने पर अड़े रहे। समर्थकों ने विरोध में तोड़फोड़ भी की। पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

करूणानिधि के निधन पर केंद्र ने 8 अगस्‍त को राष्‍ट्रीय शोक की घोषणा की है। दिल्‍ली सहित सभी राज्‍यों की राजधानी में राष्‍ट्रीय ध्‍वज आधा झुका रहेगा। तमिलनाडु में राज्‍य सरकार ने 7 दिन के शोक की घोषणा की है। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी सहित अन्‍य नेताओं ने ट्वीट कर करूणानिधि के निधन पर शोक जताया है।

करूणानिधि क्‍यों थे कलाईनार

13 चुनाव लड़े और हर बार जीते।

करीब 20 साल तक सीएम रहे।

50 साल पार्टी अध्‍यक्ष रहे।

64 साल लेखन किया। 2 लाख से ज्‍यादा पन्‍ने लिखे।

70 से ज्‍यादा फिल्‍मों की कहानी-संवाद लिखे।

तमिलनाडु के दिग्‍गज नेता एम. करूणानिधि नहीं रहे। वे 94 साल के थे उनका जन्‍म 1924 में थिरूक्‍कुवालाई गांव में एक गरीब परिवार में हुआ था। वो जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करने वाले सामाजिक सुधारवादी नेता पेरियार और तमिलनाडु में पहले गैरकांग्रेसी मुख्‍यमंत्री अन्‍नादुरई के समर्थक थे। फिल्‍मों के जरिए दिए गए सामाजिक संदेश की वजह से पार्टी का आधार मजबूत हुआ। करूणानिधि ने अपने जीवन में कभी कोई चुनाव नहीं हारा। पहला विधानसभा चुनाव 1957 में जीता जब देश में जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। 1969 में पहली बार तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री बने तो इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी। आखिरी चुनाव 2016 में जीता। इस वक्‍त देश में मोदी युग शुरू हो चुका था। 1967 में तमिलनाडु में डीएमके ने कांग्रेस सरकार को सत्‍ता से बाहर कर दिया। तब से कांग्रेस राज्‍य में कभी सत्‍ता में वापस नहीं आ पाई है।

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