[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: कौन सी नई बात है श्रम विभाग तो हमेशा से विवादित ही रहा है  – News 4 India

कौन सी नई बात है श्रम विभाग तो हमेशा से विवादित ही रहा है 

 

छिन्‍दवाड़ा न्‍यूज 4 इंडिया। अधिकारी अर्थात लोक सेवक मतलब यह माना जाता है कि यह आम जन की कार्य को सुविधापूर्ण बनाने के लिए और उनकी समस्याओं का निराकरण करने के लिए पद ग्रहण करते हैं पर ऐसा तो देखने में कम ही आता है खासकर अगर हम बात श्रम विभाग की करें तो यहां विभाग हमेशा से विवादों में घिरा रहता है हमेशा सुर्खियां बटोरने में माहिर है यह विभाग अभी जो नया मामला सामने आ रहा है वह मजदूरों के पंजीयन से हैं क्योंकि श्रम अधिकारी के पद पर पदस्थ मैडम पिछले 1 माह से अवकाश पर हैं जिसके कारण ना सिर्फ मजदूरों के पंजीयन पर बल्कि गुमास्ता एक्ट सहित अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

हमेशा विवादों में घिरे रहने वाले श्रम विभाग में नया पेंच आकर फंस गया है। पहले निरीक्षकों की वजह से सुर्खियों में रहने वाला श्रम विभाग इस बार श्रम पदाधिकारी को लेकर विवादों में है। असल में डेढ़ माह से मैडम छुट्टी पर हैं। इस वजह से न तो यहां से कोई लाइसेंस जारी हो रहे हैं और न ही मजदूरों का पंजीयन किया जा रहा है।

श्रम पदाधिकारी के पद पर पदस्‍थ सुश्री सिंह 5 जुलाई से अवकाश पर हैं। प्रभारी के रूप में प्रशासनिक अधिकारियों ने यहां का सारा दरोमदार अतुल वैद्य को सौंप दिया है। स्‍थानीय स्‍तर पर ये व्‍यवस्‍था बनाई गई है। अब हालत ये हैं कि डिजिटल सिग्‍नेचर सहित अन्‍य हस्‍ताक्षरों का पावर अतुल वैद्य के पास नहीं है। जिस वजह से दुकानदारों को जारी होने वाले गुमास्‍ता के लाइसेंस अटके पड़े हैं। सैकड़ों दुकानदार वेटिंग में हैं, लेकिन लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे हैं। यहां पदस्‍थ अमला भी पशोपेश में है कि यदि डिजिटल सिग्‍नेचर के आधार पर लाइसेंस जारी कर दिए गए और मैडम का यहां स्‍थानांतरण कर दिया गया तो वे दिक्‍कत में आ जाएंगे।

नहीं हो रहा पंजीयन

निर्माण मजदूरों के पंजीयन की प्रक्रिया भी इसी वजह से अटकी पड़ी है। पंजीयन के लिए आवेदन आए हैं, लेकिन सिर्फ सिग्‍नेचर नहीं हो पाने के कारण ये प्रक्रिया भी यहां पूरी नहीं हो पा रही है। जिस वजह से मजदूरों के पंजीयन पर भी प्रश्‍न चिन्‍ह लग गया है।

इधर भी हो रहा असर

दिक्‍कत सिर्फ पंजीयन की नहीं, बल्कि शुक्रवार को गुमास्‍ता एक्‍ट के तहत होने वाली कार्रवाई भी इस वजह से अटक पड़ी है। जिससे इन दुकानों में काम करने वाले श्रमिक परेशान हैं।

बिना पंजीयन के निर्माण मजदूर कार्य कर रहे हैं ऐसे में यदि कोई दुर्घटना घटती है तो इसकी जिम्‍मेदारी तय करने वाला कोई नहीं है। मुआवजा राशि भी मजदूर को न‍हीं मिलेगी।

श्रम पदाधिकारी के अवकाश पर होने से विभागीय भुगतान की प्रक्रिया भी पिछले डेढ़ माह से अटकी हुई है। जबलपुर में हुए श्रमिक सम्‍मेलन का भुगतान आज तक नहीं हुआ और न ही फंड की डिमांड की गई है।

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