[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: अब यह सुन सकते हैं आपके फोन का रिकॉर्ड  – News 4 India

अब यह सुन सकते हैं आपके फोन का रिकॉर्ड 

नई दिल्‍ली न्‍यूज 4 इंडिया। सेबी की एक समिति की सिफारिश अगर मानी गई तो पूंजी बाजार के रेगुलेटर को फोन सुनने का अधिकार मिल सकता है। अभी यह जांच के लिए टेलीकॉम कंपनी से किसी भी व्‍यक्ति के कॉल रिकॉर्ड मंगवा सकता है, लेकिन पूर्व कानून सचिव टी.के. विश्‍वनाथन की अध्‍यक्षता वाली समिति का मानना है कि यह काफी नहीं। सेबी को फोन कॉल और सभी तरह के इलेक्‍ट्रानिक कम्‍युनिकेशन को बीच में सुनने या देखने(इंटरसेट) का अधिकार होना चाहिए।समिति ने 9 अगस्‍त को 116 पेज की रिपोर्ट सेबी चेयरमैन अजय त्‍यागी को सौंपी। इसमें कहा गया है कि सेबी के पास सीबीडीटी जैसी दूसरी एजेंसियों के बराबर अधिकार होने चाहिए, तभी यह आर्थिक अपराध को ठीक से नियंत्रित कर सकता है। समिति की सिफारिश है कि किसी कंपनी में गड़बडि़यों को उजागर करने वाले व्हिसलब्‍लोअर के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। समिति का गठन पिछले साल अगस्‍त में किया गया था। सेबी ने इस पर 24 अगस्‍त तक सभी पक्षों से राय मांगी है। इस समिति में लॉ फर्म, म्‍यूचअल फंड, ब्रोकर, फॉरेसिंक ऑडिटर, स्‍टॉक एक्‍सचेंज, इंडस्‍ट्री चैंबर, डेटा  एनालिटिक्‍स फर्म और सेबी के प्रतिनिधि थे।

फोन टैपिंग से कई घोटाले पकड़े गये

अमेरिका सहित कई देशों में पूंजी बाजार के रेगुलेटर को फोन कॉल सुनने का अधिकार है। कॉल इंटरसेप्‍शन के जरिए ही भारतीय मूल के रजत गुप्‍ता और श्रीलंकाई मूल के राज राजरत्‍नम का मामला पकड़ में आया था। रजत गुप्‍ता पर गोपनीय सूचनाएं राजरत्‍नम को देने के आरोप थे।

सिफारिशें- बड़ी कंपनियों की फास्‍टट्रैक जांच होनी चाहिए

विश्‍वनाथन समिति ने बड़ी और छोटी कंपनियों की जांच अलग-अलग तरीके से करने की बात कही है। इसका मानना है कि बड़ी कंपनियों की गड़बडि़यों की जांच के लिए सेबी में अलग अधिकारी होने चाहिए। इनके पास इन्‍हीं की जांच की जिम्‍मेदारी रहे। बड़ी कंपनियों के मामलों की तहकीकात फास्‍टट्रैक आधार पर होनी चाहिए। छोटी कंपनियों के मामलों की जांच के लिए दूसरे अधिकरी हैं। उनकी जांच भी सामान्‍य तरीके से की जा सकती है।

हर कंपनी इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए आचार संहिता बनाए

समिति का कहना है कि हर कंपनी इनसाइडर ट्रेडिंग रोकने के लिए कोड ऑफ कंडक्‍ट बनाए और उस पर अमल सुनिश्चित करे। अगर कोई कंपनी या व्‍यक्ति अपनी घोषित संपत्ति से ज्‍यादा की ट्रेडिंग करता है तो उसे फ्रॉड माना जाना चाहिए, खासककर उन मामलों में जहां गलत तरीके से शेयर भाव घटाने-बढाने की बात हो। समिति ने ऑडिटर, एकाउंटेट, एनालिस्‍ट और कंसल्‍टेंट्स के लिए अलग कोड ऑफ कंडक्‍ट की सिफारिश की है।

चंदा कोचर-धूत जैसे विवादों के कारण सिफारिशें जरूरी

ये सिफारिशें इस संदर्भ में महत्‍वपूर्ण हैं कि हाल के दिनों में कंपनियों में गड़बडि़यां सामने आई हैं। आईसीआईसीआई बैंक की एमडी चंदा कोचर के पति दीपक और वीडियोकोन ग्रुप के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत का मामला विवादों में है। एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और टाटा मोटर्स में संवेदनशील सूचनाएं वाट्सएप के जरिए लीक होने के मामले भी सामने आए हैं।

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