[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: एक राज्य एक वोट की सिफारिश खारिज – News 4 India

एक राज्य एक वोट की सिफारिश खारिज

नई दिल्‍ली न्‍यूज 4 इंडिया। सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर आधारित बीसीसीआई के नए संविधान को कुछ अहम बदलाव के साथ मंजूरी दे दी। कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी की दो अहम सिफारिशों को खारिज कर दिया। ये सिफारिशें एक राज्‍य एक वोट और अधिकारियों के दो कार्यकाल के बीच कूलिंग ऑफ पीरियड की थी । एक राज्‍य, एक वोट की सिफारिश खारिज होने का मतलब है कि महाराष्‍ट्र और गुजरात में मौजूद सभी एसोसिएशन बीसीसीआई में अपनी फुल मेंबरशिप कायम रखेंगे। महाराष्‍ट्र में महाराष्‍ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के अलावा मुंबई और विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन भी हैं। इसी तरह गुजरात में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अलावा सौराष्‍ट्र और बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन भी है।

इन एसोसिएशनों के अलावा कई अधिकारियों को भी राहत मिल गई है। अब लगातार दो कार्यकाल के बाद कूलिंग ऑफ पीरियड की जरूरत पड़ेगी। यानि अब कोई अधिकारी राज्‍य में बीसीसीआई में या दोनों को मिलाकर लगातार छह साल तक पद पर रह सकता है। लोढ़ा कमेटी ने एक टर्म के बाद कूलिंग ऑफ पीरियड की सिफारिश की थी।

2015 में गठित हुई थी समिति

जस्टिस मुकुल मुदगल कमेटी की रिपोर्ट में ढांचागत बदलावों की सिफारिश की थी। इसके लिए लोढ़ा समिति का जनवरी 2015 में गठन किया गया था। मुदगल कमेटी वर्ष 2013 में आईपीएल में स्‍पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी की जांच से जुड़ी थी। तब आईपीएल की दो टीमें बैन हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई 2016को लोढ़ा समिति की सिफारिशों को स्‍वीकार किया था। कोर्ट ने बोर्ड और राज्‍य संघों में सिफारिशों को लागू कराने के लिए प्रशासकों की समिति(सीओए) का भी गठन किया था। सीओए का काम इन सिफारिशों के लागू होने तक भारतीय बोर्ड का संचालन करना है।

पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय की अध्‍यक्षता वाली सीओए को अबन इन सिफारिशों को लागू कराने का जिम्‍मा सौंपा गया है जो निर्देशों के लिए फिर से अदालत से संपर्क कर सकती है।

रेलवे सेना और यूनिवर्सिटीज की बोर्ड में स्‍थाई सदस्‍यता बरकरार

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्‍यक्षता वाली खंडपीठ ने बीसीसीआई तमिलनाडु सोसायटी के रजिस्‍ट्रार जनरल को चार सप्‍ताह के अंदर नाए संशोधित बीसीसीआई संविधान मसौदे को रिकॉर्ड करने के लिए निर्देश भी दिए। खंडपीठ रेलवे, सेना और यूनिवर्सिटी की स्‍थाई सदस्‍यता को भी बरकरार रखने का फैसला किया। इन्‍हें लोढ़ा समिति की सिफारिश पर रद्द कर दिया गया।

30 दिनों के अंदर बोर्ड का नया संविधान लागू करें राज्‍य संघ

कोर्ट ने साथ ही क्रिकेट संघों को आदेश दिए हैं कि वे 30 दिनों कें अंदर बीसीसीआई के संविधान को लागू करें। सीओए को इस प्रक्रिया की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। राज्‍य संघों को नियम उल्‍लंघन करने की स्थिति में सजा के लिए भी चेताया गया है। उल्‍लेखनीय है कि पांच जुलाई को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक चुनाव कराने से रोक लगाई थी।

तमिलनाडु क्रिकेट में संघ ने किया था कूलिंग पीरियड का विरोध

पिछली सुनवाई में तमिलनाडु क्रिकेट संघ (टीएनसीए) ने बीसीसीआई और राज्‍य संघों के पदाधिकारियों के लिए कूलिंग ऑफ पीरियड का विरोध किया था। टीएनसीए ने साथ ही पदाधिकारियों के लिए 70 वर्ष की आयु तक पद पर रहने की सिफारिश का भी विरोध किया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 70 वर्ष की आयु निर्धारित करने के नियम को बरकरार रखा है।

9 साल या इससे ज्‍यादा पद पर रह चुके अधिकारी अयोग्‍य घोषित

जो अधिकारी बीसीसीआई में कुल 9 साल या इससे अधिक समय तक पद पर रह चुके हैं तो वे आगे बोर्ड में कोई पद नहीं संभाल सकेंगे। इसी तरह राज्‍य एसोसिएशन में 9 साल या अधिक पद पर रहने वाले उस राज्‍य एसोसिएशन में पद नहीं संभाल सकेंगे। हालांकि, राज्‍य में नौ साल पद पर रहने वाले बीसीसीआई के लिए अयोग्‍य घोषित नहीं होंगे।

 

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