59 साल की उम्र में की पीएचडी, 34 साल पुराने सपने को किया साकार

59 साल की उम्र में की पीएचडी, 34 साल पुराने सपने को किया साकार


रायपुर, । उम्र के जिस पड़ाव में व्यक्तिगत अरमान कम होने लगते हैं, लोग अपने बेटे, पोते की अच्छी पढ़ाई के लिए चिंतित रहते हैं, उस पड़ाव में भिलाई इस्पात प्लांट में कार्यरत श्रीराम देवांगन ने 59 साल की उम्र में पीएचडी पूरी की। दिनभर प्लांट में काम करते और रात में लैम्प के सहारे अपनी थिसिस लिखते थे। समय बचाकर कॉलेज जाकर गाइड लेते और करीब पांच साल में पीएचडी पूरी की।

श्रीराम देवांगन कहते हैं कि परिवार में अभी तक किसी ने पीएचडी नहीं की थी। पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती है, इसलिए 34 साल के पुराने सपने को पूरा करने के लिए पढ़ाई की। श्रीराम देवांगन कहते हैं कि उनको नौकरी भी नहीं मिलेगी। न ही वे किसी कॉलेज में पढ़ा सकते हैं, लेकिन उनके भीतर पढ़ने की जो जिज्ञासा थी, उसे पूरा करने के लिए काम के साथ पढ़ाई पूरी की।

देवांगन ने तुलाराम कॉलेज उतई के प्रोफेसर डॉ रीता गुप्ता के निर्देशन और कल्याण कॉलेज भिलाई के डॉ. फिरोजा जाफर अली के मार्गदर्शन में अपना शोधकार्य पूरा किया। उनके शोध का विषय ‘प्रभाकर चौबे के समग्र साहित्य में सामाजिक सरोकार ‘ रहा। रविवि से पीएचडी अवार्ड होते ही वे खुशी से फूले नहीं समां रहे। श्रीराम देवांगन दूसरे शोधार्थियों के लिए भी मिसाल बन गए हैं। सबसे दिलचस्प यह है कि उनको पीएचडी कराने वाले प्रोफेसर्स भी उनसे कम उम्र के हैं।

ऐसे किया पढ़ाई के लिए संघर्ष घर में बच्चे जब अध्ययन-अध्यापन के लिए बाहर के विवि में चले गए तो उन्होंने अनुमति लेकर 2010 में रविवि से प्राइवेट फार्म भरकर हिन्दी साहित्य से एमए की डिग्री ली। इसके बाद प्री पीएचडी की परीक्षा देकर पीएचडी के लिए भी फार्म भर दिया। जब से मार्गदर्शन के लिए डॉ. रीता गुप्ता के पास आए तो वे उनकी इस उम्र में इच्छाशक्ति देखकर हैरान नहीं खुश हुए। उन्होंने सोचा कि बिना लोभ के इस उम्र में भी विनम्रता से कोई शख्स छात्र बनकर सीखने आया है। उन्होंने गाइड बनने के लिए हामी भर दी।

शोध विषय में खूब किया अध्ययन

श्रीराम देवांगन का शोध विषय ‘प्रभाकर चौबे के समग्र साहित्य में सामाजिक सरोकार ‘ रहा। उन्होंने निष्कर्ष के तौर पर बताया कि प्रभाकर चौबे पत्रकारिता के माध्यम से ‘ गांधी जी मिले’, ‘विज्ञापन के बहाने’ पुस्तक के जरिए समाज सुधार पर विशेष कार्य किया है। कई लेख के जरिए उन्होंने अमेरिका, छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद जैसे ज्वलंत मुद्दों पर उन्होंने खूब कटाक्ष कर इसमें भू माफियाओं के खेल को उजागर किया गया है। इसे शोध में बताया गया है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *