भागी आकर

छिन्दवाड़ा न्यूज 4 इंडिया। दो  प्रदेशों की सीमा पर दहशत का पर्याय बनी आदमखोर बाघिन 9 अक्टूबर को दो घंटे जाल में फंसी रही। इसके बाद शाम करीब सवा छह बजे बाघिन चकमा देकर भाग गई। टीम ने बाघिन को जाल में फंसाने के लिए तीन बकरियां भी बांध रखी थी, पर बाघिन ने टीम की हरकतों को भांपकर बकरियों का शिकार नहीं किया। नरखेड़ क्षेत्र के रेंजर कांतेश्वर बोलके ने बताया कि बाघिन को पकड़ने के लिए करीब तीन हेक्टेयर के दायरे में जाल लगाया गया था, दो बकरियों को बांधकर और एक बकरी को जाल में खुला छोड़ दिया था। दोपहर में बाघिन जाल में आई, उसने टीम की हरकतों को भांप लिया और बिना शिकार किए दुबककर जाल में बैठी रही। शाम करीब सवा छह बजे वह जाल के छोटे हिस्से से कूदकर भाग गई। देर शाम को काटोल के समीप हाइवे के किनारे कलमुंडा गांव में उसकी लोकेशन मिली। इसी आधार पर टीम ने अभियान आगे बढ़ाया। सर्चिंग ऑपरेशन में महाराष्ट्र के वन विभाग की रेस्क्यू ओर बाघिन को ट्रैंकर्यूलाइज करने हैदराबाद से नवाज तथा दिल्ली से वसीज जमशेद नामक शूटर भी साथ थे।

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