गोधरा की सजा पर फैसला

अहमदाबाद न्यूज 4 इंडिया। गुजरात हाईकोर्ट ने गोधरा कांड के 11 दोषियों को फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी है। साथ ही 20 लोगों को उम्रकैद और 63 लोगों को बरी किए जाने के एसआईटी कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साबरमती एक्सप्रेस में आगजनी में मारे गए 59 लोगों के परिजनों को 6 हफ्ते के भीतर 10-10 लाख रू. मुआवजा देने का भी आदेश दिया। हाईकोर्ट ने तत्कालीन गुजरात सरकार और रेलवे के कामकाज पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहे। कोर्ट 63 लोगों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर एसआईटी की याचिका भी खारिज कर दी।

इन 11 लोगों को

अदुल रज्जाक मुख्य साजिशकर्ता

अमन गेस्ट हाउस में साथियों के साथ एस-6 बोगी को निशाना बनाकर आग के हवाले करने की साजिश की।

महबूब चंदा- साजिश में शामिल समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाया।

सलीम जर्दा- साजिश को अंजाम दिया और पेट्रोल का इंतजाम किया।

इरफान कलंदर- चेन पुलिंग कर गाड़ी रोकी। इसी बीच गेस्ट हाउस से पेट्रोल लाकर एस-6 पर छिड़का।

जबीर बहेरा- रिक्शे से पेट्रोल मौके पर यानी ए-केबिन में पहुंचाया।

हसन चर्खा- चेन खींच कर ट्रेन रोकी। पेट्रोल ए-केबिन में पहुंचाया।

रमजानी बहेरा- एस-6 पर पत्थर फेंके। सरिए से खिड़कियां भी तोड़ीं।

हाजी बिलाल- लोगों को भड़काया, कहा- उमरजी ने आदेश दिया है कि डिब्बे को फूँकना है।

मेहबूब हसन-एस-7 से एस-6 बोगी में पहुंच पेट्रोल पीपे प्लांट किए।

सिराज मेडा- आग के लिए पेट्रोल खरीद कर गेस्ट हाउस पहुंचाया।

इरफान पाटलिया- ट्रेन पर पथराव फिर पेट्रोल लेकर मौके पर पहुंचा।

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