[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: भेदभाव क्यों | News 4 India

भेदभाव क्यों

जबलपुर न्यूज 4 इंडिया। पूर्व में दिए गए मौकों के बाद भी व्यापंम घोटाले में निलंबित किए गए एक चिकित्सक का आवेदन का निराकरण न किए जाने को हाईकोर्ट ने आड़े हाथों लिया हें चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस राजीव कुमार दुबे की युगलपीठ ने कहा है कि प्रथम दृष्ट्या अनावेदकों ने अदालत की अवमानना के लिए मुल्तवी करके कहा कि तब तक यदि याचिकाकर्ता के आवेदन का निराकरण न हुआ तो अगली पेशी पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को हाजिर रहना पड़ेगा। यह अवमानना याचिका छिंदवाड़ा के डॉक्टर अनिल कदवे की ओर से दायर की गई है। आवेदक कहना है कि वे छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में शल्य विशेषज्ञ के पद पर पदस्थ थे। व्यापंम घोटाले में उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने पर उन्हें 9 जनवरी 2015 को निलंबित कर दिया गया था। आवेदक का कहना था कि उनक साथ अन्य लोगों पर भी मामला दर्ज हुआ था जिन्हें बाद में सर्विस में वापस ले लिया गया था, लेकिन उनके मामले में कोई कार्रवाई न होने पर एक याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी। एकलपीठ ने 13 अक्टूबर 2016 को उनकी याचिका का निराकरण करते हुए सक्षम ऑथोरिटी के समक्ष अभ्यावेदन पर 45 दिनों में उचित आदेश जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर यह अवमानना याचिका दायर की गई थीं मामले पर 10 अक्टूबर को आगे हुए सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि 13 अक्टूबर 2016 को दिए गए आदेश के बाद 3 मौके सरकार को दिए गए, लेकिन याचिकाकर्ता के आवेदन का निराकरण नहीं हुआ। इतना ही नहीं, आज फिर से समय मांगा जा रहा है। इसे आड़े हाथों लेते हुए युगलपीठ ने प्रमुख सचिव की हाजिरी के सशर्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता वीडीएस चौहान पैरवी कर रहे हैं।

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