27 सालों में पहली बार शहीद कमांडो

श्रीनगर न्यूज 4 इंडिया। जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में 11 अक्टूबर सुबह आतंकियों के साथ भीषण मुठभेड़ हुई। इसमें वायुसेना के दो गरूड़ कमांडो शहीद हो गए। आतंकी भी मारे गये । कश्मीर में आतंकवाद फैलने के 27 साल में पहली बार आतंकियों के खिलाफ किसी कार्रवाई में वायुसेना के जवान शहीद हुए हैं। इससे पहले 2 जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले में एक गरूड़ कमांडो शहीद हुआ था। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि राख पारिबल हाजिन क्षेत्र में तीन से पांच आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद राज्य पुलिस विशेष अभियान दस्ते और सेना ने सुबह पौने पांच बजे संयुक्त अभियान चलाया।

ढाई साल की ट्रेनिंग के बाद तैयार होते हैं

गरूड़ कमांडो ढाई साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद तैयार किए जाते हैं। ये ट्रेनिंग इतनी मुश्किल होती है कि आधे तो कुछ ही महीनों में छोड़कर चले जाते हैं। अत्याधुनिक हथियारों से लैस इस फोर्स को हवाई क्षेत्र में हमला करने, दुश्मन की टोह लेने, हवाई आक्रमण करने, स्पेशल काम्बैट और रेस्क्यू आपरेशन्स के लिए तैयार किया जाता है।

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