मैंने यह फैसला आपके हित में लिया

मैंने यह फैसला आपके हित में लिया
बाजार में रौनक थी हर कोई तैयारियों में लीन था लोग नए कपड़े खरीद रहे थे हर किसी के मन में एक ही सवाल था कुछ दिनों के बाद दिवाली है कैसे हम इस पर्व का पूर्ण आनंद प्राप्त कर सकते हैं हां WhatsApp पर भी लोगों ने चुटकी ले-लेकर पटाखे फोड़ने और ना फोड़ने पर विचार मंथन किया सभी के मन में एक सवाल था पूरी दुनिया और विश्व के विभिन्न देश विभिन्न जश्न में पटाखों का उपयोग करते हैं फिर हम पर प्रतिबंध क्यों क्या यह हमारी स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है चिंतन करते करते हम सभी का पूरा सप्ताह बीत गया अब दिवाली की घड़ी आ गई घर के छोटे बच्चे WhatsApp की चुटकियों से लेकर पर्यावरण की सुरक्षा तक का चिंतन सुन रहे थे मानव को हो रही पर्यावरण से क्षति Intex ऊपर उठ रहा है और हम हमारे बहुत से साथियों को सिर्फ इसलिए खो रहे हैं की प्रदूषण के चलते प्राकृतिक संतुलन बिगड़ चुका है और हम मूर्ख बनकर न पर्यावरणको बचाने के लिए पहल कर रहे हैं और ना ही कोई ऐसा उपाय कर रहे हैं जिससे हमारे उत्सव मनाने की प्रवृत्ति मैं ऐसा अंकुश लगे कि हम पर्यावरण की सुरक्षा के साथ साथ निरंतर ही मानव सभ्यता के बचाव के लिए प्रयास कर सकें घर में बैठे बच्चे ने इस विचार मंथन से निष्कर्ष निकाल दिया और कह दिया मैं इस दीवाली में एक भी पटाखे नहीं छोड़ूंगा यह निश्चित ही आवश्यक हो गया है हमें चिंता करनी पड़ेगी मानव और मानव का जीवन किसी धर्म जाति उत्सव और आयोजनों से कहीं ऊपर है हमने फैसला ले लिया हम आपके लिए और आपके अपनों के लिए इस पृथ्वी के लिए यह निर्णय लेते हैं की दुनिया कुछ भी करें हम अपने मजे और उत्सव के आयोजन के लिए पटाखे फोड़ कर प्रकृति को विनाश की ओर अग्रसर नहीं कर सकते मेरी आस्था और विश्वास दीपावली के आयोजन में है मैं मां लक्ष्मी की पूजा करती हूं इसलिए कभी भी प्रकृति के विनाश की ओर अपनी सहभागिता देना पसंद नहीं करूंगी मैं आभार व्यक्त करना चाहूंगी न्यायपालिका का जिसने एक बहस छेड़ दी कि क्या पटाखों का उपयोग मानवी जीवन के लिए युक्तियुक्त रूप से तर्कसंगत है अंतः निष्कर्ष पर पहुंच गए कि यह उपयोग मानव सभ्यता के लिए विनाशी है इसलिए शायद छोटा बच्चा गलती समझ गया और उसने निर्णय ले लिया वह पटाखे कभी नहीं तोड़ेगा इस बार का प्रदूषण Intex देखकर मुझे लगा दिए मेरे बेटे के समान समझदार और भी लोग हैं जिन्होंने इस दीवाली में कम प्रदूषण कर अपने अच्छे मानव होने का परिचय दिया और हां एक बात और इस दीवाली में पटाखे ना फोड़ कर मां लक्ष्मी और सरस्वती की आराधना कर हमने अधिक समय ध्यान के लिए बिताया
साल 2015 में भारत में प्रदूषण की वजह से करीब 25 लाख लोग मारे गए। ये संख्या दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले सबसे ज्यादा है।

लैनसेट कमीशन की प्रदूषण और स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में करीब 90 लाख लोग प्रदूषण की वजह से मारे गए। मृतकों के ये आंकड़े एड्स, मलेरिया और ट्यूबरकुलोसिस जैसी घातक बीमारियों से मरने वाले लोगों से तीन गुना ज्यादा हैं।

रिपोर्ट में दूसरे नंबर पर चीन है, जिसमें 18 लाख लोग प्रदूषण की चपेट में आकर अपनी जान गवां बैठे। रिपोर्ट की माने विश्व में हर छह में से एक शख्स की मौत प्रदूषण की वजह से होती है। इसमें सबसे ज्यादा मौतें विकासशील देशों में होती हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर बैन का आदेश जारी किया था। इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ। कइयों ने दिवाली पर आतिशबाजी से होने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए इस प्रतिबंध को स्वीकार किया तो कइयों ने कोर्ट के आदेश की जमकर धज्जियां उड़ाईं।

कोर्ट के इस आदेश व लोगों में थोड़ी-बहुत जागरूकता का असर था कि पिछले कई सालों के मुकाबले इस बार दिवाली के दिन बहुत कम आतिशबाजी देखने को मिली। अब हर किसी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का असर हवा की गुणवत्ता पर कितना पड़ा है।

हालांकि, भारत भर में दिवाली के बाद हवा में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक ढंग से बढ़ा है, लेकिन बीते सालों की अपेक्षा यह कम है। जहां दिल्ली में कई जगहों पर हवा में पीएम10 का स्तर 999 तक पहुंचा तो वहीं पश्चिम बंगाल में यह केवल 46 रहा। बिहार में यह 142 से 160 के बीच रहा तो यूपी में 170 से 210 तक पहुंच गया। मध्यप्रदेश में यह 153 रहा तो वहीं राजस्थान में 310। मुंबई में पीएम10 का स्तर 410 पर रिकॉर्ड किया गया।
पिछले साल ऐसे थे हालात –
साल 2016 में दिवाली के दौरान प्रदूषण लेवल वर्ष 2015 की तुलना में दोगुना मापा गया था। सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान 2016 में पीएम पर्टिकुलेट मैटर 2.5 1238 पाया गया था जो कि 2015 के 435 के मुकाबले दोगुने से भी कहीं अधिक था। वर्ष 2016 में दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में दिल्ली शुरुआती 11 शहरों में शामिल था। इसमें भारत के करीब तीन शहर शामिल थे। वहीं वर्ष 2017 में टॉप 10 प्रदूषित शहरों की बात करें तो इसमें भारत के रायपुर, पटना और ग्वालियर का नाम शामिल है। 2015 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली की एयर क्वालिटी को ‘बेहद खराब’ घोषित किया था।

दिल्ली में ऐसी रही प्रदूषण की स्थिति –

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार दिवाली पर हवा की गुणवत्ता बेहतर है। हालांकि बोर्ड के एयर क्वालिटी इंडेक्स पर आनंद विहार का जो आंकड़ा दिख रहा है वह डराने वाला है। सुबह 8 बजे आनंद विहार में पीएम10 का स्तर 2402 था, जबकि पीएम 2.5 का स्तर 473 दर्ज किया गया। दिल्ली के द्वारिका इलाके में इसी समय पीएम 2.5 का स्तर 657.20 था। पंजाबी बाग में पीएम10 का स्तर सुबह 8.20 बजे 1,587 के स्तर पर था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शुक्रवार सुबह 8 बजे दिल्ली में हवा की औसत गुणवत्ता 355 रही, जो पिछले साल 438 थी।

नोएडा के सेक्टर 125 में सुबह 8.30 बजे पीएम10 का स्तर 784, जबकि पीएम2.5 भी 555 के स्तर पर था। नोएडा सेक्टर 62 में पीएम10 का स्तर 456 और पीएम 2.5 भी 284 के स्तर पर था। गाजियाबाद के वसुंधरा में भी लगभग इसी समय पीएम10 का स्तर 587 और 2.5 भी 358 के स्तर पर था। एनसीआर के फरीदाबाद में दिवाली की रात 10.30 बजे पीएम 2.5 का स्तर 1066 तक पहुंच गया था।

एयर क्वालिटी इंडेक्स को ऐसे समझें –

0-50 अच्छी

51-100 संतोषजनक

101-200 मध्यम

201-300 खराब

301-400 बहुत खराब

401 से ऊपर चिंताजनक स्थिति

खतरनाक हैं ये महीन कण –

बता दें कि यह सभी हवा में तैरते हुए बेहद महीन कण होते हैं जो सांस के जरिए इंसान के अंदर जाते हैं और फैफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे लोग जो अस्‍थमा से ग्रसित हैं उनके लिए प्रदूषण का यह स्थल जानलेवा है हम आपको बता देना चाहेंगे दिवाली और उसके बाद बहुत से अस्थमा के रोगी अपनी जान गवा देते हैं

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