गर्भवती मासूम और बेदर्द पुलिस

भोपाल न्यूज 4 इंडिया। कोचिंग से लौट रही छात्रा से दुष्कर्म के बाद राजधानी को मिला जख्म अभी भरा नहीं कि पुलिस ने फिर बेदर्दी सिद्ध कर दी। भोपाल स्टेशन पर मिली एक और बच्ची के मामले में केस दर्ज करने के बजाय उसे जबलपुर भेजने की तैयारी पुलिस ने कर ली। इधर सरकार बेटियों को सुरक्षा देने के बजाय कोचिंग सेंटरों से आग्रह कर रही है कि रात 8 बजे तक इंस्टीट्यूट न खोलें, और यदि खोला भी तो छात्राओं को घर छोड़ने की जिम्मेदारी भी लेने के लिए तैयार रहें। ऐसे में अब यही सवाल उठा रहा है कि बेटियां आखिर रात में क्यों नहीं निकल सकतीं। और इस रात की सुबह कब तक होगी यह तो पता नहीं।

पीएससी की तैयारी कर रही छात्रा से दुष्कर्म मामले में अपनी कार्यों से शर्मसार हो चुकी जीआरपी और पुलिस का एक और बेदर्दी चेहरा सामने आया है। 3 नवंबर को भोपाल रेलवे स्टेशन पर ज्यादती की शिकार एक 12 साल की बच्ची जीआरपी को मिली थी। जीआरपी ने रेलवे चाइल्ड लाइन को इसकी खबर देकर अपने कर्तव्य से पीछे हट गया।

चाइल्ड लाइन ने मेडिकल कराया तो पता चला कि उसे 4 महीने का गर्भ है। कई बार ज्यादती भी हुई है, लेकिन जीआरपी ने मामले की संपूर्ण जानकारी तो दूर एफआईआर तक दर्ज करना उचित नहीं समझा। रेलवे पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि बच्चों को फौरन सहायता मिले इसलिए रेलवे चाइल्ड ने बच्ची को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया, जहां से उसे गौरवी वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर भेजने के निर्देश दिए गए। गौरवी को इस मामले में एफआईआर करनी चाहिए थी, लेकिन उसने तो बच्ची को रखने से भी मना कर दिया। तीन दिनों से बालिका गृह में मौजूद बच्ची को इलाज भी नहीं मिल रहा है। 12 साल की मासूम का मामला नई मुसीबत न खड़ी कर दे इसलिए 6 नवंबर को बाल कल्याण समिति ने उसे भोपाल से जबलपुर भेजने की तैयारी कर ली।

मंत्री का फरमान

सरकार कोचिंग और निजी हॉस्टल को नियंत्रण में लाने के लिए नए नियम बनाने जा रही है। स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने 6 नवंबर को कहा कि कोचिंग इंस्टीट्यूट रात 8 बजे बंद कर देना चाहिए। यदि क्लास लगाते हैं तो छात्राओं को घर छोड़ने की जिम्मेदारी उनकी होगी। कोचिंग इंस्टीट्यूट से एप तैयार करने को कहा जाएगा, जिसमें छात्रों की लोकेशन ट्रेस करने की व्यवस्था होगी।

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