न हटाए जाएं जनप्रतिनिधि

जबलपुर न्‍यूज 4 इंडिया। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को तब तक पद से हटाने के आदेश न दिए जाएं जब तक कि ऐसा काने के लिए कोई ठोस कारण न हो। ऐसा इसलिए क्‍योंकि जनप्रतिनिधि को हटाए जाने के बाद के परिणाम काफी गंभीर होते हैं। चीफ जस्टिस हेमंत शुक्‍ला और जस्टिस विजय कुमार शुक्‍ला की युगलपीठ ने इस मत के साथ सतना जिले की जैतवारा नगर परिषद अध्‍यक्ष को 5 साल के लिए अयोगय ठहराए जाने वाले चुनाव आयोग के आदेश को खारिज भी कर दिया।

यह अपील जैतवारा नगर परिषद के अध्‍यक्ष अजय कुमार दोहर की ओर से दायर की गई थी। अजय कुमार दोहर सितंबर 2014 में हुए नगर परिषद चुनाव में अध्‍यक्ष निर्वाचित हुए थे।

मध्‍यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 32बी के तहत याचिकाकर्ता को चुनाव में खर्च हुए राशि का ब्‍यौरा 30 दिनों के भीतर चुनाव आयोग को देना था। यह जानकारी अजय कुमार ने दी, लेकिन आयोग ने पाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उन्‍होंने बैंक खाता खोलकर उसमें राशि जमा करके या निकालकर हर दिन खर्च नहीं की। इस मामले में नोटिस जारी होने के बाद पूरी प्रक्रिया करके चुनाव आयोग ने 21 नवंबर 2016 को अजय कुमार दोहर को आगामी 5 वर्षों के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्‍य ठहरा दिया था। आयोग के इस आदेश के खिलाफ एक याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई, जिसके 20 जुलाई 2017 को खारिज होने पर यह अपील दायर की गई थी।

मामले पर हुई सुनवाई के दौरान अजय कुमार दोहर की ओर से अधिवक्‍ता रोहित सौगरहा ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अपील मंजूर करते हुए युगलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव खर्चों के लिए बैंक खाता न खोलने के नाम पर किसी उम्‍मीदवार को 5 साल के लिए अयोग्‍य ठहराया जाना अनुचित है। किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को हटाने के काफी गंभीर परिणाम होते हैं। जब तक कोई ठोस कारण न हो, तब तक ऐसे जनप्रतिनिधि को पद से नहीं हटाया जाना चाहिए। इस मत के साथ युगलपीठ ने चुनाव आयोग द्वारा आवेदक के खिलाफ जारी आदेश को अनुचित ठहराकर खारिज कर दिया।

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